Smriti Mandhana Video: 'मुझे सहानुभूति बिल्कुल पसंद नहीं...', स्मृति मंधाना ने खोला अपनी निजी जिंदगी और संघर्ष का राज

भारतीय उपकप्तान स्मृति मंधाना ने साफ कहा कि उन्हें रोने-धोने या सहानुभूति बिल्कुल पसंद नहीं है. वे अपनी निजी भावनाओं को कैसे संभालती हैं और खेल से प्रेरणा लेने की बात पर जोर देती हैं, जानें.

Smriti Mandhana On Her Life: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना मैदान पर जितनी शांत और कॉन्फिडेंट नजर आती हैं, अपनी निजी भावनाओं को लेकर भी उतनी ही साफ सोच रखती हैं. हाल ही में पॉडकास्टर राज शमानी के साथ बातचीत में मंधाना ने बताया कि जब वह किसी मुश्किल दौर से गुजरती हैं तो खुद को किस तरह संभालती हैं. उन्होंने साफ कहा कि उन्हें रोना-धोना या लोगों की सहानुभूति बिल्कुल पसंद नहीं है.

‘मुझे सहानुभूति बिल्कुल पसंद नहीं’

मंधाना ने बताया कि उनके लिए सबसे मुश्किल चीज लोगों की सहानुभूति है. अगर कोई उन्हें दुखी देखकर बार-बार पूछे कि क्या हुआ या उनके साथ सहानुभूति जताए, तो उन्हें यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता.

उन्होंने कहा कि अगर वह किसी मैच में आउट होने के बाद दुखी हैं और सामने वाला यह समझ ले कि वह दुखी हैं, तो उसके बाद मिलने वाली सहानुभूति उन्हें पसंद नहीं आती. मंधाना के मुताबिक, वह नहीं चाहतीं कि कोई उन्हें देखकर यह सोचे कि 'बेचारी दुखी है.'
उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि लोग उन्हें मजबूत इंसान के तौर पर देखें. उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं और मजबूत हैं. उनके लिए यह सिर्फ दुनिया को दिखाने की बात नहीं है, बल्कि वह खुद भी इसी तरह अपनी जिंदगी को देखती हैं.

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परिवार और निजी जिंदगी पर ज्यादा बात क्यों नहीं करतीं?

स्मृति मंधाना ने यह भी बताया कि वह इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी या परिवार से जुड़ी मुश्किलों के बारे में बहुत ज्यादा बात क्यों नहीं करतीं. उनका मानना है कि अगर वह अपनी कहानी लोगों के सामने रखेंगी तो बातचीत का फोकस उनके खेल से हटकर उनकी निजी परेशानियों पर चला जाएगा.

मंधाना ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि लोग उनकी कहानी सुनकर उनके प्रति Sympathy महसूस करें. वह चाहती हैं कि लोग उन्हें एक खुशमिजाज इंसान के रूप में देखें और उनके खेल से प्रेरणा लें. उन्होंने कहा, 'मेरी कहानी से नहीं, मेरे गेम से इंस्पायर हो.' उनके लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि लोग उनके संघर्ष की कहानी सुनकर दया महसूस करने के बजाय उनके प्रदर्शन और खेल से कुछ सीखें.

जो बीत गया उससे सीख लेकर आगे बढ़ने पर जोर

मंधाना ने बातचीत में यह भी बताया कि मुश्किल दौर या पुराने अनुभवों को लेकर वह ज्यादा समय तक अटकी नहीं रहतीं. उनका नजरिया साफ है-जो हो गया, उससे सीखो और फिर आगे बढ़ो. यही सोच शायद मैदान पर उनकी बल्लेबाजी में भी नजर आती है. खराब मैच हो या कोई निजी परेशानी, मंधाना अपनी भावनाओं को खुद तक रखने और फिर अगले मौके पर ध्यान देने की कोशिश करती हैं.

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लेखक के बारे में

By अभिजीत कुमार

अभिजीत कुमार युवा पत्रकार हैं, जिन्हें खेल और खासकर क्रिकेट की दुनिया को करीब से समझने और उसकी अनकही कहानियों को पाठकों तक पहुंचाने का जुनून है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम किया है.

वर्तमान में वह स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के लेखन, संपादन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी संभालते हैं. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आंकड़ों, रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से जुड़ी कहानियों की दुनिया है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर मैदान के पीछे की दिलचस्प घटनाओं तक, वह हर कहानी को सरल, सटीक और रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश करते हैं.

उनका मानना है कि एक अच्छी स्पोर्ट्स स्टोरी सिर्फ खबर नहीं बताती, बल्कि पाठक को उस पल का हिस्सा महसूस कराती है. यही सोच उनके लेखन की पहचान है और यही वजह है कि उनके आर्टिकल्स में खबर के साथ कहानी, संदर्भ और क्रिकेट का जुनून भी नजर आता है.

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