Murali Sreeshankar: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है. बुधवार (29 जुलाई) को भारत के स्टार लंबी कूद खिलाड़ी (Star long jumper) मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लॉन्ग जंप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश की झोली में 13वां मेडल डाल दिया. स्कॉटलैंड के ग्लासगो स्थित स्कॉटस्टन स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई और दूसरा स्थान हासिल किया. हालांकि भारतीय एथलीट गोल्ड मेडल से बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन जमैका के टेजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर उन्हें पीछे छोड़ दिया. श्रीशंकर महज 6 सेंटीमीटर के अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए.
दूसरे प्रयास में बनाई बढ़त
फाइनल में श्रीशंकर ने अपने पहले प्रयास में 8.02 मीटर की छलांग लगाकर शानदार शुरुआत की. इस प्रयास के बाद वह दूसरे स्थान पर थे, जबकि दो खिलाड़ी 8.08 मीटर के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर बने हुए थे. दूसरे प्रयास में भारतीय स्टार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8.09 मीटर की छलांग लगाई और सीधे पहले स्थान पर पहुंच गए. इसके बाद उनके लगातार दो प्रयास फाउल रहे, जिसका फायदा जमैका के टेजे गेल ने उठाया. गेल ने अपने अगले प्रयास में 8.15 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल कर लिया. श्रीशंकर ने अंतिम दो प्रयासों में वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन वह 8.15 मीटर का आंकड़ा पार नहीं कर सके और अंत में सिल्वर मेडल के साथ प्रतियोगिता समाप्त की.
लगातार दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर
इस उपलब्धि के साथ मुरली श्रीशंकर ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया. वह कॉमनवेल्थ गेम्स की लॉन्ग जंप स्पर्धा में लगातार दो बार पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. इससे पहले बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता था. इस बार उन्होंने अपनी दूरी में मामूली सुधार करते हुए 8.09 मीटर तक पहुंच बनाई, लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें फिर रजत पदक से संतोष करना पड़ा.
चोट के बाद दमदार वापसी
पिछले करीब दो वर्षों से मुरली श्रीशंकर चोटों से जूझ रहे थे. इसी कारण वह कई अहम प्रतियोगिताओं से भी बाहर रहे. ऐसे में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए वापसी का सबसे बड़ा मंच साबित हुआ. क्वालिफाइंग राउंड में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में फाइनल का टिकट हासिल कर लिया था, जिससे भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें और बढ़ गई थीं. फाइनल में भी उन्होंने बिना किसी दबाव के शानदार शुरुआत की और आखिर तक पदक की दौड़ में बने रहे.
लोकेश सत्यनाथन पांचवें स्थान पर रहे
भारत की ओर से पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में लोकेश सत्यनाथन ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 7.97 मीटर की छलांग लगाई. हालांकि यह दूरी उन्हें पदक की दौड़ में नहीं ला सकी और वह प्रतियोगिता में पांचवें स्थान पर रहे.
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
मुरली श्रीशंकर का यह सिल्वर मेडल भारत के लिए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 13वां पदक है. एथलेटिक्स में भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में शामिल श्रीशंकर ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा साबित करते हुए देश को गौरवान्वित किया. लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है और इससे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी भारतीय एथलेटिक्स को नई उम्मीद मिली है.
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