Ishan Kishan Birthday: क्रिकेट में कई खिलाड़ी शानदार शुरुआत करते हैं, लेकिन मुश्किल दौर आने पर खुद को संभाल नहीं पाते. ईशान किशन की कहानी इससे अलग है. एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें भारतीय टीम से बाहर होना पड़ा, बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से नाम हटा दिया गया और उनके करियर पर सवाल उठने लगे. लेकिन ईशान ने हार मानने के बजाय वापसी का रास्ता चुना और आज वह फिर से भारतीय क्रिकेट के अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. आज 18 जुलाई को ईशान किशन अपना 28वां जन्मदिन मना रहे हैं.
जब करियर पर लग गया था ब्रेक
दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ सिर्फ 126 गेंदों में दोहरा शतक जड़कर ईशान किशन ने इतिहास रच दिया था. वह वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने. ऐसा लग रहा था कि उनका करियर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने मानसिक थकान और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए क्रिकेट से ब्रेक ले लिया. इसके बाद वह घरेलू क्रिकेट में भी नियमित रूप से नहीं खेले. बीसीसीआई ने अनुशासन और उपलब्धता को लेकर सख्त रुख अपनाया और ईशान को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया. यह उनके करियर का सबसे कठिन दौर माना गया.
ऐसे हुई ईशान की भारतीय टीम में वापसी
कई खिलाड़ियों के लिए यह झटका करियर को पटरी से उतार सकता था, लेकिन ईशान ने जवाब बल्ले से देने का फैसला किया. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की, लगातार रन बनाए और झारखंड के लिए नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाली. उनकी कप्तानी में झारखंड ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जीता. इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान फिर से उनकी ओर खींचा और राष्ट्रीय टीम के दरवाजे दोबारा खुल गए.
वापसी के बाद फिर दिखा पुराना अंदाज
भारतीय टीम में लौटने के बाद ईशान ने वही आक्रामक बल्लेबाजी दिखाई, जिसके लिए वह जाने जाते हैं. विकेटकीपर-बल्लेबाज ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में तेजी से रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की और टीम में जगह मजबूत की.
टी20 विश्व कप 2026 में निभाई बड़ी भूमिका
ईशान की मेहनत का सबसे बड़ा इनाम टी20 विश्व कप 2026 में मिला. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अहम योगदान दिया और भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कुछ साल पहले जिस खिलाड़ी का भविष्य अनिश्चित दिख रहा था, वही खिलाड़ी विश्व कप जीतने वाली टीम का अहम सदस्य बन गया.
12 साल की उम्र में शुरू हुआ था संघर्ष
ईशान का संघर्ष सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था. बिहार के पटना में जन्मे ईशान को बेहतर क्रिकेट अवसरों की तलाश में 12 साल की उम्र में घर छोड़कर रांची जाना पड़ा था. शुरुआती दिनों में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि कई बार बिना खाना खाए रात गुजारनी पड़ी. लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया.
हार नहीं मानने का नाम है ईशान किशन
ईशान किशन की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि असफलता और आलोचनाएं अंत नहीं होतीं. सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाने से लेकर विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बनने तक का उनका सफर बताता है कि मेहनत और धैर्य के दम पर किसी भी मुश्किल दौर को पीछे छोड़ा जा सकता है.
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