CWG 2026 Gold Medal Price: स्कॉटलैंड की राजधानी ग्लासगो में गुरुवार 23 जुलाई से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज होने जा रहा है. इन खेलों में दुनिया के 70 से ज्यादा देशों के 3000 से अधिक एथलीट हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं. इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन पहले के मुकाबले सीमित स्तर पर हो रहा है और सिर्फ 10 खेलों में अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. हालांकि खेलों की संख्या कम होने से पदकों की अहमियत कम नहीं होती. हर खिलाड़ी के लिए एक मेडल वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सपनों का परिणाम होता है. इनमें भी गोल्ड मेडल को सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है. लेकिन क्या जिस पदक को खिलाड़ी अपनी सबसे बड़ी कामयाबी मानते हैं, वह वास्तव में पूरी तरह सोने का बना होता है? यह सवाल हर बड़े खेल आयोजन के दौरान लोगों के मन में जरूर उठता है.
क्या गोल्ड मेडल सच में पूरा सोने का होता है?
कॉमनवेल्थ गेम्स हों, एशियन गेम्स हों या फिर ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन, इन सभी में दिए जाने वाले गोल्ड मेडल में असली सोने का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि पूरा मेडल सोने से नहीं बनाया जाता. दरअसल, गोल्ड मेडल का बड़ा हिस्सा स्टर्लिंग सिल्वर यानी विशेष क्वालिटी वाली चांदी से तैयार किया जाता है. आमतौर पर इसमें करीब 92.5 प्रतिशत हिस्सा चांदी का होता है, जबकि इसके ऊपर कम से कम 6 ग्राम शुद्ध सोने की परत चढ़ाई जाती है. यही वजह है कि मेडल देखने में पूरी तरह सुनहरा (सोने के रंग का) नजर आता है.
पूरे सोने का मेडल क्यों नहीं बनाया जाता?
अगर गोल्ड मेडल को पूरी तरह शुद्ध सोने से बनाया जाए तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. इसके अलावा शुद्ध सोना एक मुलायम धातु (Metal) होती है, जिससे मेडल का आकार समय के साथ प्रभावित हो सकता है. इस समस्या को दूर करने के लिए पहले मजबूत चांदी से मेडल तैयार किया जाता है और फिर उसके ऊपर शुद्ध सोने की परत चढ़ाई जाती है. इससे मेडल मजबूत भी रहता है और उसमें सोने की चमक भी बनी रहती है. वहीं सिल्वर मेडल पूरी तरह स्टर्लिंग सिल्वर से बनाया जाता है, जबकि ब्रॉन्ज मेडल कांसे से तैयार होता है.
गोल्ड मेडल की कीमत कितनी है?
ग्लासगो गेम्स 2026 के गोल्ड मेडल की सटीक कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है. इसकी वजह यह है कि मेडल की कीमत कई बातों पर निर्भर करती है. इनमें उस समय सोने और चांदी के बाजार भाव, मेडल का वजन, डिजाइन और निर्माण लागत शामिल हैं. आम तौर पर एक गोल्ड मेडल को तैयार करने में करीब 1 से 2 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. हालांकि इसकी असली कीमत सिर्फ इसमें लगी धातु से तय नहीं होती. खिलाड़ियों के लिए इसकी सबसे बड़ी कीमत भावनात्मक और ऐतिहासिक होती है.
ग्लासगो गेम्स के मेडल किसने डिजाइन किए?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए तैयार किए गए मेडल को ग्लासगो की रहने वाली डिजाइनर मिलित्सा मिलेन्कोवा ने डिजाइन किया है. इन पदकों को खास तौर पर ग्लासगो की संस्कृति और खेलों की भावना को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इन मेडल का निर्माण इंग्लैंड के बर्मिंघम स्थित प्रसिद्ध क्राफ्ट कंपनी ‘टॉय, केनिंग एंड स्पेन्सर’ ने किया है. यह कंपनी लंबे समय से पदक, सम्मान चिन्ह और विशेष स्मृति वस्तुओं के निर्माण के लिए जानी जाती है.
मेडल की चमक से ज्यादा मायने रखती है उसकी कहानी
किसी भी खिलाड़ी के लिए गोल्ड मेडल सिर्फ सोने की चमक नहीं होता. इसके पीछे सालों की मेहनत, त्याग, अनुशासन और देश का गौरव जुड़ा होता है. यही कारण है कि भले ही गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का न हो, लेकिन जीतने वाले खिलाड़ी के लिए इसकी कीमत किसी भी खजाने से कम नहीं होती. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी जब खिलाड़ी पोडियम पर खड़े होकर यह मेडल अपने गले में पहनेंगे, तो उसकी चमक सिर्फ धातु की नहीं बल्कि उनकी मेहनत और उपलब्धि की होगी.
इसे भी पढ़े- CWG 2026: ग्लासगो में होगी भव्य ओपनिंग सेरेमनी, जानिए कब-कहां देखें लाइव और कौन होंगे खास मेहमान
