वानखेड़े में एक बार फिर होगी CSK और MI की भिड़ंत, रेस में बने रहने के लिए बेहद अहम है मुकाबला

CSK vs MI : क्या मुंबई और चेन्नई के मुकाबले में उनके दोनों दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा ग्राउंड में दिखेंगे? इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब तो अबतक नहीं आया है, लेकिन फैंस यह जानना चाह रहे हैं. दोनों ही टीमें बदहाल हैं और रेस में बने रहने के लिए जूझ रही है, अब देखना यह है कि उनका आज का प्रदर्शन कैसा रहता है.

CSK vs MI : मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 23 अप्रैल की शाम को एक बेहद अहम मुकाबला मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला जाएगा. आईपीएल के इतिहास में सबसे अधिक बार पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस (MI) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) जब आमने-सामने होंगी, दोनों टीमें जीत दर्ज करना चाहेगी. अभी प्वाइंट टेबल में दोनों टीमें बहुत ही खराब प्रदर्शन के साथ सातवें और आठवें स्थान पर हैं.

क्या रुतुराज गायकवाड़ का प्रदर्शन सुधरेगा?

मुंबई और चेन्नई दोनों की ही टीमें आईपीएल के इस सीजन में 6-6 मैच खेल चुकी है और मात्र दो-दो मैच में ही इन्होंने जीत दर्ज की है. लगातार चार मैच हारने के बाद मुंबई की टीम ने गुजरात टाइटंस को 99 रन से हराया, तो उनका मनोबल बढ़ा है, लेकिन हैदराबाद से 10 रन से हारने के बाद चेन्नई की हालत पस्त है. खराब फॉर्म में चल रहे चेन्नई के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ अपने फाॅर्म को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. गायकवाड़ इस सीजन में अब तक बहुत खराब खेले हैं, उन्होंने छह पारियों में 13.66 के औसत और 112.32 के स्ट्राइक रेट से सिर्फ 82 रन बनाए हैं, जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 28 रहा है. गायकवाड़ ने मुंबई के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है, इसी वजह से यह उम्मीद की जा रही है कि आज के मैच में रुतुरात का बल्ला चलेगा.रुतुराज को अगर फाॅर्म में वापस आना है, तो उनके लिए मुंबई से बेहतर कोई विरोधी नहीं है, उन्होंने नौ मैचों में 41.57 के औसत से 241 रन बनाए हैं, जिसमें 151 से ज़्यादा का स्ट्राइक रेट और तीन अर्द्धशतक शामिल हैं.

मुंबई के खिलाफ पिछले 5 में से 4 मैच चेन्नई ने जीते हैं

मुंबई और चेन्नई के बीच खेले गए मैच के आंकड़ों को देखें तो हम पाएंगे कि मुंबई ने 21 मैच जीते हैं, जबकि चेन्नई 18 जीत पाई है. लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 5 मैच में से 4 में चेन्नई की टीम विजेता रही है. दोनों ही टीम इस आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है,लेकिन आज शाम वही टीम जीतेगी, जिनकी रणनीति और मनोबल बेहतर होगा.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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