शिखर धवन ने युवा खिलाड़ियों को दिया ‘ दा वन स्पोर्ट्स’ का तोहफा, कहा-क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया

Shikhar Dhawan : भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बैटर रहे शिखर धवन ने युवा खिलाड़ियों के लिए हाई परफार्मेंस सेंटर लाॅन्च किया है. इस सेंटर में युवा खिलाड़ियों को बेहतरीन ट्रेनिंग दी जा सकेगी.

Shikhar Dhawan : शिखर धवन के हाई परफार्मेंस सेंटर ‘ दा वन स्पोर्ट्स’ को ग्वालियर में लांच किया किया. दा वन एचपीसी पूरे भारत में इस तरह का पहला सेंटर है. इस पहल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि युवा खिलाड़ियों की पहचान, ट्रेनिंग और उनके खेल को उच्च स्तर तक पहुंचाया जा सके.

शिखर ने कहा-क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया

शिखर धवन ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है, इसलिए यह मेरा फर्ज है कि मैं इस खेल और इस देश के युवाओं को कुछ वापस दूं. इसी उद्देश्य से दा वन की स्थापना की गई है. उन्होंने कहा, हमारा पहला एचपीसी ग्वालियर में बन रहा है. हमने बेहतरीन कोच रखे हैं जो मेरे और मेरी टीम के सोचने के तरीके को लागू करेंगे. हमने आदित्य वर्ल्ड अकादमी और बुंदेलखंड बुल्स के साथ टाई अप किया है. जो बच्चे अच्छा प्रदर्शन करेंगे, वे बुंदेलखंड बुल्स के लिए खेलेंगे. दूसरे भारतीय शहरों में भी सेंटर खोलने हैं और विस्तार करना है. ग्वालियर में दा वन स्पोर्ट्स में सबा करीम तकनीकी निदेशक के तौर पर काम करेंगे और धवन के बचपन के कोच मदन शर्मा मेंटोर होंगे.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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