राजस्थान से हारने के बाद गुजरात टाइटंस के बैटिंग कोच मैथ्यू हेडन ने कहा- बड़े मैच में सही फैसलों की सख्त जरूरत होती है

IPL 2026 : गुजरात टाइटंस की टीम अपने होम ग्राउंड पर राजस्थान राॅयल्स की टीम से मैच महज 6 रन से हार गई. यह हार उनके लिए एक सबक की तरह थी, जिसके बारे में उनके बल्लेबाजी कोच मैथ्यू हेडन ने कहा कि अगर हम सही फैसले लेते, तो मैच जीत सकते थे.

IPL 2026 : गुजरात टाइटंस की टीम को आईपीएल के 19वें सीजन में लगातार दूसरी हार नसीब हुई है. इस हार के बावजूद गुजरात टाइटंस के बल्लेबाजी कोच मैथ्यू हेडन यह चाहते हैं कि उनके बल्लेबाज एकजुट होकर खेलें, ताकि आगे के मुकाबलों में टीम बेहतर प्रदर्शन कर सके.

रवि बिश्नोई की गेंद पर वाशिंगटन सुंदर का आउट होना बहुत महंगा पड़ा

मैथ्यू हेडन ने मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि वाशी (वाशिंगटन) सुंदर अगर बिश्नोई जैसे गेंदबाज के खिलाफ आक्रामण करने जा रहे थे, तो उन्हें सोच समझकर फैसला करना चाहिए था. बिश्नोई काफी अच्छी लय में थे. उस वक्त उनसे फैसला लेने में गलती हुई.शुरुआत के 12 ओवर में ज्यादा कुछ गलत नहीं हुआ था, लेकिन उसके बाद कई फैसले गलत हो गए.रवि बिश्नोई के हाथों वाशिंगटन के आउट होने के बाद शाहरुख खान का रन आउट होना भी गुजरात टाइटंस को बहुत महंगा पड़ा.

बड़े स्कोर का पीछा करने में टीम को एकजुट रहना चाहिए

मैथ्यू हेडन ने कहा कि शाहरुख खान भी रन आउट हो गए, जबकि उस वक्त शाहरुख खान और राशिद को सही फैसला लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि लगातार दो विकेट गंवाने से फर्क पड़ता है. हम सिर्फ 6 रन से हारे, अगर फैसले सही होते और टीम ज्यादा एकजुटता दिखाती तो शायद मैच का परिणाम कुछ और होता. टी20 क्रिकेट में जब आप एक बड़े स्कोर का पीछा कर रहे होते हैं तो छोटी-छोटी चीजें बल्लेबाजों का सही फैसला बहुत जरूरी होता है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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