मुंबई इंडियंस को हराने के बाद बोले CSK के कप्तान रुतुराज गायकवाड़-कॉन्फिडेंस बूस्टर की तरह है यह जीत

CSK vs MI : आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम मुंबई इंडियंस को हराकर प्वाइंट टेबल में नंबर छह पर आ गई है. शुरुआत से खराब प्रदर्शन कर रही टीम को इससे थोड़ी राहत मिली है और अगर उनका प्रदर्शन अगले पांच मैचों में अच्छा रहता है, तो प्लेऑफ की दौड़ उनके लिए असंभव नहीं रहेगी.

CSK vs MI : चेपाॅक के मैदान पर शनिवार की शाम जब दो चिर प्रतिद्वंद्वी चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस भिड़े तो रोमांच उस तरह का नहीं दिखा, जैसा हमेशा इन दोनों टीमों के मैच में दिखता है. पहले बैटिंग करते हुए मुंबई की टीम ने अच्छी शुरुआत नहीं की और बहुत सम्मानजनक स्कोर भी खड़ा नहीं कर पाई. जवाब में खेलते हुए सीएसके की टीम ने 160 रन के टारगेट को 18.1 ओवर में ही पूरा कर लिया. सीएसके की जीत से टीम को नयी ऊर्जा मिली है और टीम फीलगुड कर रही है.

यह जीत हमारे लिए कॉन्फिडेंस-बूस्टर

सीएसके की जीत के बाद टीम के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने कहा कि यह जीत हमारे लिए कॉन्फिडेंस-बूस्टर की तरह है. जीत के बाद असल में अच्छा लग रहा है. हमने अच्छी शुरुआत की. हम 20-30 रन कम टारगेट का पीछा कर रहे थे. कुछ ओवर में हम थोड़ा पिछड़े,लेकिन उसके बाद हमने वापसी कर ली. हमने एक बड़ी और ताकतवर टीम के खिलाफ जीत हासिल की है, इसलिए एनर्जी तो मिलेगी ही.

कार्तिक सिक्स हिटर है

कार्तिक शर्मा के बेहतरीन प्रदर्शन पर रुतुराज गायकवाड़ ने कहा कि वह अपने बॉलर्स को चुनता है और उसके बाद अपने शाॅट्‌स खेलता है. वह एक अच्छा सिक्स हिटर है. नंबर चार पर आकर उसने टीम को अच्छा बैलेंस दिया.वह फास्ट बॉलर को बहुत अच्छे से खेल सकता है, अगर जरूरत हो, तो वह स्पिनर्स का भी सामना कर सकता है. वह स्ट्राइक रोटेट भी कर सकता है. यह एक बहुत ही अच्छा साइन है.

अकील को टीम में ना रखना बैलेंस ठीक करने की कोशिश

मैच के बाद रुतुराज गायकवाड़ से जब यह पूछा गया कि अकील को प्लेइंग इलेवन में क्यों नहीं रखा गया, तो उसने कहा कि सबसे पहले हमने सोचा टीम का बैलेंस कैसे ठीक किया जाए. हमने सोचा नंबर आठ पर एक्स्ट्रा बैटर कैसे लाया जाए और अगर जरूरत हो, तो एक्स्ट्रा बॉलर भी, और थोड़ा लेफ्ट-हैंडर, जो नीचे बैटिंग ऑर्डर में भी बैटिंग करे. हमारे पास वी और घोष ऐसे दो लोग थे जो दोनों रोल बहुत अच्छे से कर सकते थे. इसी वजह से उन्हें मौका दिया गया और कुछ नहीं है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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