लखनऊ की जीत का जश्न आवेश खान ने बिना हेलमेट के मनाया, तो दर्शकों को याद आया 2023 का विवाद

Avesh Khan : कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्‌स के मैच में जब आखिरी गेंद पर जीत के लिए लखनऊ को एक रन बनाना था और मैदान पर आवेश खान थे, तो सबको उनसे जुड़ा एक विवाद याद आ गया, जब मैच जीतने पर आवेश खान ने अपना हेलमेट जमीन पर पटक दिया था.

Avesh Khan : कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्‌स के मैच में जब लास्ट बाॅल पर लखनऊ की टीम को जीत के लिए एक रन बनाना था, तो नाॅन स्ट्राइकर एंड पर खड़े आवेश खान ने अपना हेलमेट खोल दिया था. इसकी वजह शायद 2023 का वो विवाद है, जब आवेश खान ने जीत की खुशी में अपना हेलमेट जमीन पर पटक दिया था. आवेश खान के इस व्यवहार के लिए उन्हें काफी ट्रोल किया गया था.

कोलकाता के मैच में आवेश खान ने अंतिम ओवर में हेलमेट क्यों नहीं पहना था?

कोलकाता और लखनऊ का मैच 9 अप्रैल को काफी रोमांचक हो गया था. अंतिम ओवर में 12 रन बनाना था, जिसे बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए मुकुल चौधरी ने बना लिया. जब ऐसा महसूस होने लगा कि लखनऊ की टीम मैच जीत जाएगी तो आवेश खान ने अपना हेलमेट उतार दिया. इसकी वजह शायद रन लेने के लिए दौड़ने में आसानी भी एक कारण हो सकता है, लेकिन उनसे जुड़े हेलमेट विवाद को इसका बड़ा कारण बताया जा रहा है.

2023 में आवेश खान ने हेलमेट को जमीन पर पटक दिया था

आईपीएल 2023 में आवेश खान ने आरसीबी के खिलाफ खेलते हुए जीत का जश्न मनाने के लिए अपने हेलमेट को जमीन पर दे मारा था. उनके इस एक्शन को अत्यधिक आक्रामक और नियमों के खिलाफ बताया गया था. आवेश खान को इस एक्शन की वजह से सोशल मीडिया में काफी ट्रोल भी किया गया था. साथ ही बीसीसीआई ने भी उनपर कार्रवाई की थी और उन्हें इस तरह के व्यवहार के लिए चेतावनी दी गई थी.

हेलमेट पटकने की वजह क्या थी?

10 अप्रैल 2023 को लखनऊ सुपर जायंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु के बीच बेंगलुरु में मैच खेला जा रहा था. मैच बेहद रोमांचक था,लखनऊ को आखिरी गेंद पर 1 रन चाहिए था. आवेश खान स्ट्राइक पर थे,उन्होंने गेंद मिस कर दी थी लेकिन विकेटकीपर की गलती की वजह से उन्हें एक रन मिल गया था और लखनऊ की टीम मैच जीत गई थी. जीत की खुशी में आवेश खान ने अपना हेलमेट उतारकर
ज़मीन पर जोर से पटक दिया था, जिसे लेकर विवाद हो गया था.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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