World Cup 2023 Ind vs NZ : तूफानी पारी से रोहित शर्मा बने ‘सिक्सर किंग’, क्रिस गेल का रिकाॅर्ड तोड़ा

रोहित शर्मा ने आज वानखेड़े स्टेडियम में अपने 47 रन के स्कोर में चार चौके और चार छक्के जड़े. इन चार छक्कों की मदद से रोहित शर्मा विश्व कप में सबसे अधिक 27 छक्का जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए हैं.

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने आज विश्व कप 2023 के सेमीफाइनल में अपने अर्धशतक से भले ही चूक गए हों, लेकिन उन्होंने एक विश्व कप में सर्वाधिक सिक्सर मारने का क्रिस गेल का रिकाॅर्ड आज तोड़ दिया.

रोहित शर्मा ने आज वानखेड़े स्टेडियम में अपने 47 रन के स्कोर में चार चौके और चार छक्के जड़े. इन चार छक्कों की मदद से रोहित शर्मा विश्व कप में सबसे अधिक 27 छक्का जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए हैं.

रोहित शर्मा के पहले यह रिकाॅर्ड वेस्ट इंडीज के क्रिस गेल के नाम दर्ज था. क्रिस गेल ने 2015 के विश्वकप में 26 छक्के जड़े थे और एक बेहतरीन आक्रामक पारी खेली थी.

रोहित शर्मा अब सिक्सर किंग बन गए हैं. उन्होंने क्रिस गेल का रिकाॅर्ड तोड़ा है और 27 छक्कों के साथ सिक्सर किंग बन गए हैं. रोहित शर्मा को टिम साउदी ने आज 47 रन पर आउट किया. टिम साउदी के रोहित शर्मा पांचवीं बार शिकार बने हैं.

विश्व कप में सबसे अधिक छक्का मारने वालों की सूची में तीसरा नाम इंग्लिश खिलाड़ी इयोन माॅर्गन का है. माॅर्गन ने 2019 के विश्वकप में 22 छक्के जड़े थे.

ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल छक्का जड़ने वालों की सूची में चौथे नंबर हैं. ग्लेन मैक्सवेल ने 2023 विश्वकप में ही 22 छक्के जड़े हैं. मैक्सवेल की टीम विश्व कप 2023 के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेलने वाली है.

पांचवें नंबर दो खिलाड़ियों का नाम है, जो 21-21 छक्कों के साथ अपनी जगह सुनिश्चित करके बैठे हैं. ये दोनों खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका के हैं. एबी डिविलियर्स ने 2015 में 21 छक्के जड़े थे और क्विंटन डि काॅक ने 2023 में 21 छक्का जड़ा है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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