IND vs BAN : बांग्लादेश के हौसले बुलंद, क्लीन स्वीप से बचने के लिए टीम इंडिया ने कुलदीप यादव को बुलाया

बांग्लादेश दौरे पर गयी भारतीय टीम एकदिवसीय सीरीज का अपना दो मैच पहले ही हार चुकी है. ऐसे में बांग्लादेश टीम का मनोबल बढ़ा हुआ है. इन परिस्थितियों में अब उसका इरादा भारत का सूपड़ा साफ करने का होगा.

IND vs BAN : भारतीय क्रिकेट टीम अपने बांग्लादेश दौरे पर खराब प्रदर्शन से जूझ रही है. खिलाड़ियों की चोटों और फिटनेस की समस्या से पूरी टीम परेशान है. इसी क्रम में भारतीय टीम शनिवार को बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे खेलेगी. भारतीय टीम सीरीज पहले ही हार चुकी है और अब उसे किसी भी तरह इस सीरीज को क्लीन स्वीप से रोकना होगा.

बांग्लादेश टीम का मनोबल बढ़ा

गौरतलब है कि बांग्लादेश दौरे पर गयी भारतीय टीम एकदिवसीय सीरीज का अपना दो मैच पहले ही हार चुकी है. ऐसे में बांग्लादेश टीम का मनोबल बढ़ा हुआ है. इन परिस्थितियों में अब उसका इरादा भारत का सूपड़ा साफ करने का होगा. अगर बांग्लादेश की टीम क्लीन स्वीप करती है, तो यह उसकी ऐतिहासिक जीत होगी.

कुलदीप यादव को बुलाया गया

इस जीत से बांग्लादेश का उत्साह बढ़ेगा जिसका असर 14 दिसंबर से शुरू होने वाले टेस्ट सीरीज पर भी दिखेगा. बांग्लादेश दौरे पर टीम इंडिया 20 सदस्यों के साथ गयी थी, लेकिन सप्ताह के अंदर उसके कई खिलाड़ी चोटिल हो गये और आखिरी मैच के लिए 14 ही खिलाड़ी फिट हैं. ऐेसे में स्पिनर कुलदीप यादव को बुलाया गया है. कुलदीप ने 72 वनडे में 118 विकेट लिये हैं और वह इस टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं.

रोहित सहित कई खिलाड़ी चोटिल

रोहित शर्मा के बायें हाथ के अंगूठे की हड्डी खिसक गई है और उदीयमान तेज गेंदबाज कुलदीप सेन को पहला मैच खेलने के बाद चोट लग गयी है. तेज गेंदबाज दीपक चाहर भी अनफिट हैं. वहीं अक्षर पटेल की पसली में चोट लग गई है और वह पहला मैच नहीं खेल सके जबकि ऋषभ पंत भी चोटिल हैं और उन्हें आराम देना पड़ा है.

केएल राहुल कर सकते हैं पारी की शुरुआत

ऐसे में भारतीय टीम किस तरह सीरीज के अंतिम मैच में बांग्लादेश के सामने उपस्थित होगी और उसकी रणनीति क्या होगी, यह देखने वाली बात है. रोहित की अनुपस्थिति में केएल राहुल पारी की शुरूआत करेंगे या ईशान किशन को अंतिम एकादश में सलामी बल्लेबाज के तौर पर शामिल किया जायेगा, यह देखने वाली बात होगी. दूसरा विकल्प विराट कोहली और शिखर धवन से पारी की शुरूआत कराना भी हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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