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Pakistan ICC Trophy Fact Check: खेल में अंधविश्वास और इत्तेफाक की बाते अक्सर होती रहती है. इस समय सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही दावा बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. कई क्रिकेट फैंस का मानना है कि जब भी ऑस्ट्रेलिया (Australia) की मजबूत टीम किसी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज से बाहर होती है, तो पाकिस्तान (Pakistan) वह टूर्नामेंट जीत जाता है.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 (T20 World Cup 2026) में ऑस्ट्रेलिया के ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद पाकिस्तानी फैंस एक बार फिर से इस इत्तेफाक को लेकर खुश हो रहे है. सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है और पाकिस्तानी समर्थक अपनी टीम की जीत का सपना देख रहे है. लेकिन क्या इस दावे में पूरी सच्चाई है?
1992, 2009 और 2017 में क्या हुआ था?
पाकिस्तानी फैंस की उम्मीदों का सबसे बड़ा आधार इतिहास के तीन बड़े टूर्नामेंट है. सबसे पहले 1992 के वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाया था. उस साल इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान ने इंग्लैंड को फाइनल में हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप जीता था. इसके बाद 2009 के टी20 वर्ल्ड कप में भी ठीक यही कहानी दोहराई गई. ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में बाहर हो गया और यूनिस खान की कप्तानी में पाकिस्तान ने श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया.
तीसरी बार यह इत्तेफाक 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी में देखने को मिला. तब भी ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ था और सरफराज अहमद की कप्तानी में पाकिस्तान ने भारत को बड़े अंतर से हराकर ट्रॉफी जीती थी.
1979 और 1983 वर्ल्ड कप का असली सच
अब बात करते है क्रिकेट इतिहास के उन पन्नो की जिन्हें शायद पाकिस्तानी फैंस अपनी सुविधा के हिसाब से भूल रहे है. 1979 के प्रूडेंशियल कप यानी वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया की टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी. उस समय पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल तक तो जरूर पहुंची थी, लेकिन वहां उसे इंग्लैंड से हार का सामना करना पड़ा था.
इसके बाद 1983 के वर्ल्ड कप में भी ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गया था. उस समय पाकिस्तान और भारत दोनों सेमीफाइनल में पहुंचे थे. लेकिन पाकिस्तान को सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने बुरी तरह हरा दिया था. जबकि भारत ने फाइनल में उसी वेस्टइंडीज को हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप जीता था.
2013 चैंपियंस ट्रॉफी में भी फेल हुआ था इत्तेफाक
सोशल मीडिया पर चल रहा यह पाकिस्तानी आंकड़ा पूरी तरह से सही नहीं है. 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी इसका एक और बहुत बड़ा उदाहरण है. इस टूर्नामेंट में भी ऑस्ट्रेलिया की टीम का प्रदर्शन खराब रहा था और वे ग्रुप स्टेज से आगे नहीं जा पाए थे. अगर पाकिस्तानी फैंस का वायरल दावा सही होता, तो यह खिताब भी पाकिस्तान को ही जीतना चाहिए था. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. इस टूर्नामेंट में भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन किया और खिताब अपने नाम किया था.
फैक्ट चेक में क्या निकला सीधा नतीजा?
अगर हम इतिहास के इन सभी आंकड़ो का फैक्ट चेक करते है, तो यह साफ हो जाता है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा आधा सच और आधा झूठ है. यह बात बिल्कुल सही है कि तीन बार ऐसा इत्तेफाक हुआ है जब ऑस्ट्रेलिया के जल्दी बाहर होने पर पाकिस्तान ने ट्रॉफी उठाई है.
लेकिन क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मौजूद है जब ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ, लेकिन खिताब पाकिस्तान की जगह किसी और टीम के खाते में गया. 1979, 1983 और 2013 के टूर्नामेंट यह साबित करते है कि यह कोई पक्का नियम नहीं है.
सिर्फ इत्तेफाक नहीं, अच्छा प्रदर्शन जिताता है
खिताब क्रिकेट के मैदान पर कोई भी टीम सिर्फ अंधविश्वास या इत्तेफाक के सहारे कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीत सकती है. खिताब जीतने के लिए मैदान पर अच्छा खेल दिखाना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. पाकिस्तानी फैंस के लिए यह पुराना दावा एक अच्छा शगुन जरूर हो सकता है, लेकिन ट्रॉफी जीतने के लिए उनकी मौजूदा टीम को बल्ले और गेंद से अपना असली दम दिखाना होगा.
यह बात शीशे की तरह साफ है कि बिना अच्छी क्रिकेट खेले कोई भी टीम विश्व चैंपियन नहीं बन सकती है. इसलिए इस तरह के वायरल दावो को सिर्फ मजे के लिए देखना चाहिए, इन पर आंख मूंदकर भरोसा करना गलत है.
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