पहले देश के बारे में सोचें, फिर आईपीएल पर बात करें : रोहित शर्मा

coronavirus affect rohit sharma react : भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा का मानना है ऐसे समय में जबकि देश कोविड 19 महामारी से जूझ रहा है और जिंदगियां थम गयीं है, हालात सामान्य होने तक आईपीएल के बारे में कौन बात करना चाहता है .

मुंबई : भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा का मानना है ऐसे समय में जबकि देश कोविड 19 महामारी से जूझ रहा है और जिंदगियां थम गयीं है, हालात सामान्य होने तक आईपीएल के बारे में कौन बात करना चाहता है . चोट के कारण दो महीने से क्रिकेट से दूर रोहित को आईपीएल के जरिये वापसी करनी थी . इस महीने के शुरू में आईपीएल को 15 अप्रैल तक स्थगित कर दिया गया था लेकिन अब राष्ट्रीय स्तर पर 21 दिन के ‘लॉकडाउन’ के कारण इस टी20 टूर्नामेंट के 13वें सत्र के आयोजन की संभावना कम नजर आ रही है.

स्थिति सामान्य होने दें, फिर आईपीएल पर बात कर सकते हैं : रोहित रोहित ने कहा, ‘‘हमें सबसे पहले देश के बारे में सोचना चाहिए. पहले स्थिति बेहतर होनी चाहिए फिर हम आईपीएल के बारे में बात कर सकते हैं. पहले जीवन को सामान्य होने दें. ” यह सलामी बल्लेबाज अपने साथी युजवेंद्र चहल के साथ इंस्टाग्राम पर बातचीत के दौरान सवाल का जवाब दे रहा था. भारत में अब तक कोरोना वायरस के 724 मामले दर्ज किये गये हैं और 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

विश्व स्तर पर इस महामारी के कारण 22 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. भारत भर में बंद के कारण भारतीय महानगर भी सुनसान बने हुए हैं. रोहित ने कहा, ‘‘मैंने बंबई (मुंबई) को पहले ऐसे कभी नहीं देखा. क्रिकेटर होने के कारण हमें परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता. कई दौरों पर जाना होता है. यह समय उनके साथ बिताने के लिये है. ” रोहित आईपीएल में मुंबई इंडियन्स के कप्तान और सीमित ओवरों में भारत के उपकप्तान हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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