Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह से जुड़े अलग-अलग रत्न बताए गए हैं. पुखराज भी इन्हीं प्रमुख रत्नों में से एक है. इसका संबंध बृहस्पति यानी गुरु ग्रह से माना जाता है. यह पीले रंग का रत्न होता है. गुरु को ज्ञान, शिक्षा, विवाह, संतान, धन और करियर से जुड़े मामलों का कारक माना जाता है.
पुखराज पहनने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति देखना जरूरी होता है. केवल किसी की सलाह पर या किसी दूसरे व्यक्ति को देखकर यह रत्न नहीं पहनना चाहिए. इस धारण करने के लिए लग्न, भाव और दूसरे ग्रहों के साथ गुरु की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है. आइए ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से जानते हैं कि पुखराज किसे पहनना चाहिए, इसके क्या फायदे हैं और इसे पहनने की विधि क्या है.
पुखराज किसे पहनना चाहिए?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अगर कुंडली में गुरु पहले, पांचवें, नौवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तो पुखराज धारण किया जा सकता है. इसके अलावा, अगर कुंडली में गुरु की राहु, केतु, शनि या मंगल के साथ युति हो, तो भी पुखराज पहनने की सलाह दी जा सकती है.
पुखराज पहनने से क्या फायदे होते हैं?
पुखराज धारण करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, विवाह और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. यह रत्न पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ने, सही निर्णय लेने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है. इसके अलावा, विवाह और संतान से जुड़े मामलों में भी पुखराज को महत्वपूर्ण माना जाता है.
किन लोगों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए?
ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा के अनुसार, मकर, कुंभ और मिथुन लग्न वाले लोगों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए. इसके अलावा, अगर कुंडली में गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो पुखराज धारण नहीं करना चाहिए. इन भावों को त्रिक भाव कहा जाता है.
पुखराज किस लग्न के लिए शुभ है?
धनु और मीन लग्न वालों के लिए पुखराज विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है. इसके अलावा मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न में भी कुंडली की स्थिति देखकर पुखराज पहना जा सकता है.
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पुखराज किस उंगली में पहनना चाहिए?
पुखराज को दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना चाहिए.
पुखराज किस धातु में पहनना चाहिए?
पुखराज को सोने की अंगूठी में पहनना शुभ माना जाता है. अगर किसी कारण से सोने की अंगूठी में पहनना संभव नहीं है, तो इसे पंचधातु में भी धारण किया जा सकता है.
पुखराज किस दिन पहनना चाहिए?
पुखराज को शुक्ल पक्ष की पंचमी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी या द्वादशी तिथि को आने वाले गुरुवार के दिन सुबह पहनना शुभ माना जाता है.
पुखराज धारण करने की विधि
- गुरुवार की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
- पुखराज को पहले दूध से साफ करें और फिर साफ पानी से धो लें.
- एक छोटी कटोरी में दूध लेकर उसमें पुखराज रखें.
- पुखराज पर हल्दी और कुमकुम अर्पित करें.
- भगवान गणेश और गुरु ग्रह का ध्यान करें.
- 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करें.
- इसके बाद पुखराज को दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करें.
पुखराज पहनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पुखराज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए. रत्न पहनने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति जरूर जांच लें. अगर पहले से कोई दूसरा रत्न पहना हुआ है, तो पुखराज उसके साथ अनुकूल है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है. पुखराज का चुनाव हमेशा कुंडली के आधार पर करना चाहिए. रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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