Sawan 2026: देवाधिदेव महादेव का प्रिय मास सावन गुरुवार से कई शुभ संयोगों के साथ प्रारंभ हो रहा है. इस वर्ष सावन का महीना आज से शुरू होकर 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के साथ संपन्न होगा. हिंदू धर्म में सावन का विशेष महत्व माना जाता है. पूरे महीने भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और व्रत पूरे श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किए जाते हैं.
शिव पुराण के अनुसार सावन में सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों को मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. वहीं विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से सावन के प्रत्येक सोमवार व्रत रखेंगी.
बरसेगी शिव-पार्वती की अपार कृपा
आचार्य राकेश झा ने बताया कि भगवान शिव की उपासना के लिए सावन सबसे श्रेष्ठ महीना माना जाता है. इस वर्ष सावन का आरंभ श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोगों में हो रहा है. ऐसे शुभ योग में उमा-महेश्वर की पूजा-अर्चना, व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
उन्होंने बताया कि भगवान शिव सभी देवताओं में सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं. वे केवल जल और बेलपत्र अर्पित करने मात्र से भी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं.
चार सोमवार का बना शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि इस वर्ष सावन में चार सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है. इनमें दो सोमवार कृष्ण पक्ष और दो सोमवार शुक्ल पक्ष में पड़ेंगे.
- पहली सोमवारी – 3 अगस्त
- दूसरी सोमवारी – 10 अगस्त
- तीसरी सोमवारी – 17 अगस्त
- चौथी एवं अंतिम सोमवारी – 24 अगस्त
उन्होंने बताया कि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से रोग, शोक, कर्ज और जीवन की विभिन्न बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है. इसके साथ ही "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, रुद्राष्टक और शिव चालीसा का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
जलाभिषेक से मिलेगा उत्तम फल
पंडित राकेश झा ने पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था. समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की थी. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिसके कारण उन्हें 'नीलकंठ महादेव' कहा गया.
मान्यता है कि विष की तीव्रता को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था. तभी से शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है. यही कारण है कि श्रावण मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं जल स्वरूप हैं, इसलिए जलाभिषेक करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है.
असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए करें यह उपाय
आचार्य राकेश झा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति या परिवार के सदस्य को गंभीर अथवा असाध्य बीमारी हो, तो सावन के सोमवार को शिवलिंग पर जल में दूध और काले तिल मिलाकर अभिषेक करना चाहिए. अभिषेक के दौरान "ॐ जूं सः" मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है.
इसके अलावा 11 हजार, 21 हजार या सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने अथवा किसी योग्य ब्राह्मण से संकल्पपूर्वक जाप कराने से रोग, शोक, दुख, जरा तथा अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलने की मान्यता है.
श्रावण मास के प्रमुख पर्व-त्योहार
- 30 जुलाई – श्रावण मास का आरंभ
- 2 अगस्त – संकष्टी गणेश चतुर्थी
- 3 अगस्त – पहली सावन सोमवारी
- 5 अगस्त – शीतला सप्तमी
- 6 अगस्त – मंगला गौरी व्रत
- 9 अगस्त – कामदा एकादशी
- 10 अगस्त – दूसरी सावन सोमवारी
- 12 अगस्त – हरियाली अमावस्या
- 15 अगस्त – हरियाली तीज
- 17 अगस्त – नाग पंचमी एवं तीसरी सावन सोमवारी
- 23 अगस्त – पुत्रदा एकादशी
- 24 अगस्त – चौथी एवं अंतिम सावन सोमवारी
- 28 अगस्त – श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन
यह भी पढ़ें: रांची सावन: शिवभक्तों के लिए पहाड़ी मंदिर पर खास इंतजाम
