Rishi Panchami 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है. यह दिन सप्तऋषियों को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से महिलाओं को रजस्वला अवस्था में अनजाने में हुए धार्मिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े दोष से मुक्ति मिलती है. इस दिन सप्तऋषियों की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है.
ऋषि पंचमी व्रत कथा
जब कन्या के शरीर में पड़ गए कीड़े
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विदर्भ देश में 'उत्तक' नाम के एक ज्ञानी और सदाचारी ब्राह्मण रहते थे. वे अपनी पत्नी सुशीला, पुत्र सुविभूषण और एक पुत्री के साथ रहा करते थे. पुत्री का विवाह एक अच्छे कुल में हुआ, लेकिन दुर्भाग्यवश वह कम उम्र में ही विधवा हो गई और अपने माता-पिता के घर लौटकर संयमित जीवन जीने लगी.
एक दिन सोते समय अचानक कन्या के पूरे शरीर में कीड़े पड़ गए. पुत्री की यह कष्टदायी स्थिति देखकर उसकी माता सुशीला बहुत दुखी हुईं. उन्होंने अपनी पुत्री को उत्तक ब्राह्मण के पास ले जाकर इस समस्या का कारण पूछा. उत्तक ब्राह्मण ने ध्यान लगाकर देखा तो उन्हें पता चला कि कन्या पिछले जन्म में भी एक ब्राह्मणी थी. उस जन्म में रजस्वला (पीरियड्स) अवस्था के दौरान उसने अनजाने में घर के बर्तन और रसोई की सामग्री को छू लिया था. साथ ही, उसने ऋषि पंचमी के व्रत का भी अनादर किया था. इसी दोष के कारण इस जन्म में उसके शरीर में कीड़े पड़ गए थे.
माता सुशीला के पूछने पर उत्तक ब्राह्मण ने पुत्री को इस दोष से मुक्ति का उपाय बताया. उन्होंने भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत रखने और सप्तऋषियों की विधि-विधान से पूजा करने के लिए कहा.
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कन्या ने दोष से मुक्ति के लिए किया ऋषि पंचमी व्रत
उत्तक ब्राह्मण के बताए अनुसार, कन्या ने भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन पवित्र जलाशय में स्नान किया. इसके बाद पूजा स्थल को गाय के गोबर से लीपकर वहां अष्टदल कमल या सर्वतोभद्र मंडल बनाया. इसके बाद मंडल पर कलश स्थापित कर सप्तऋषियों का आह्वान किया गया. इसमें कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि का पूजन किया गया.
सभी ऋषियों की जल, चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य से षोडशोपचार विधि से पूजा की गई. इसके बाद ऋषि पंचमी की कथा का श्रवण किया गया. अगले दिन विधि-विधान से उद्यापन किया गया. ब्राह्मणों को भोजन कराया गया और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा दी गई.
सप्तऋषियों की कृपा से दूर हुआ कष्ट
पिता के बताए अनुसार कन्या ने पूरी श्रद्धा और नियम के साथ ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन किया. सप्तऋषियों की कृपा से उसके पूर्वजन्म के सभी पाप और दोष समाप्त हो गए. उसके शरीर से कीड़े भी समाप्त हो गए और वह दोबारा स्वस्थ, सुंदर और कांतिवान हो गई.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में वर्णित प्रसंगों पर आधारित है. प्रभात खबर इनकी पुष्टि नहीं करता है.
