Holashtak 2026: होली से पहले आने वाले आठ दिनों को हिंदू धर्म में होलाष्टक कहा जाता है. मान्यता है कि इन दिनों वातावरण में अस्थिर और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इसलिए कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता. इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहा है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि कुछ जरूरी काम समय रहते पूरे न किए जाएं, तो घर में वास्तु दोष और परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इन आठ दिनों से पहले जरूरी काम निपटा लेना बेहतर माना जाता है.
घर से जुड़े अधूरे काम पहले करें पूरे
अगर आपके घर में निर्माण, मरम्मत, पेंटिंग या रिनोवेशन का काम चल रहा है, तो उसे होलाष्टक शुरू होने से पहले पूरा कर लें. इन दिनों में निर्माण कार्य शुभ नहीं माना जाता. ऐसा माना जाता है कि इस समय किए गए कार्यों से घर की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. इसलिए कोशिश करें कि सभी जरूरी घरेलू काम 24 फरवरी से पहले समाप्त हो जाएं, ताकि बाद में किसी तरह की बाधा या परेशानी न हो.
मांगलिक और शुभ कार्य समय से पहले निपटाएं
विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण या मुंडन जैसे मांगलिक कार्य होलाष्टक के दौरान नहीं किए जाते. धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का पूरा फल नहीं मिलता. यदि आपके घर में कोई पारिवारिक या धार्मिक कार्यक्रम तय है, तो उसे होलाष्टक से पहले ही संपन्न कर लेना चाहिए. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और वास्तु दोष की संभावना कम होती है.
घर से हटाएं टूटी-फूटी और बेकार चीजें
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पड़ी टूटी, खराब या अनुपयोगी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं. कई बार लोग पुरानी चीजें यह सोचकर संभालकर रख लेते हैं कि आगे काम आ सकती हैं, लेकिन इससे घर का वातावरण प्रभावित होता है. होलाष्टक से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें और बेकार सामान बाहर निकाल दें. इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ेगा और घर में सुख-शांति बनी रहेगी.
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भक्ति और साधना पर दें विशेष ध्यान
होलाष्टक को आत्मचिंतन और भक्ति का समय भी माना गया है. इन दिनों में महामृत्युंजय मंत्र, हनुमान चालीसा या अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना शुभ होता है. पूजा-पाठ और साधना से मन शांत रहता है और घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है. इन आठ दिनों में नए कार्य शुरू करने के बजाय आध्यात्मिक साधना पर ध्यान देना अधिक लाभदायक माना गया है.
