Ganga Saptami, Ganga Mata Ki Aarti: हिंदू धर्म में मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक हैं. उन्हें “मां” के रूप में पूजा जाता है और जीवनदायिनी माना जाता है. वैसे तो हर दिन गंगा स्नान का महत्व बताया गया है, लेकिन गंगा सप्तमी का दिन विशेष रूप से पवित्र माना जाता है. मान्यता के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा जी का पुनर्जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को गंगा जयंती भी कहा जाता है. इस पावन अवसर पर गंगा स्नान, पूजा और आरती करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है.
गंगा सप्तमी का महत्व
गंगा सप्तमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर मां गंगा की विधिपूर्वक पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए जप-तप, दान और आरती से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है. साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. यह दिन आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है.
गंगा मैय्या की आरती (Ganga Mata Ki Aarti Lyrics)
गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की आरती करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. आरती के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं—
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥
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आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
