Budh Grah Dosh: कुंडली में बुध के पीड़ित या कमजोर होने पर मानसिक बीमारी, तंत्रिका तंत्र और त्वचा से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. बुध की अशुभ स्थिति से व्यक्ति में एकाग्रता की कमी, याददाश्त कमजोर होना, तनाव, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई देखी जाती है. इसके अलावा नाक-कान से जुड़ी बीमारियां, त्वचा रोग, एलर्जी, वाणी दोष (जैसे हकलाना), गले की समस्या, श्वास संबंधी दिक्कतें तथा नसों की कमजोरी जैसी परेशानियां भी होती हैं.
वैदिक जप मंत्र
ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।।
बुध का तांत्रिक मंत्र
1- ॐ बुं बुधाय नमः
2- ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम:
बुध का बीज मंत्र
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
अधिदेवता- विष्णु
प्रत्यधिदेवता- विष्णु
जप संख्या- 9 हजार
कलियुग में जप संख्या- 36 हजार
ईशान कोण, बाणाकार मण्डल, अंगुल 4, मगध देश, अग्नि गोत्र, हरित वर्ण
मिथुन-कन्या: राशि का स्वामी
वाहन: सिंह
समिधा- अपामार्ग
दान-द्रव्य: पन्ना, सोना, कांसे का बर्तन, मूंग, खांड़, घी, हरा कपड़ा, सब फूल, हाथी दांत, कपूर, शस्त्र तथा फल
दान का समय: बुधवार को सबेरे 5 घटी तक
धारण रत्न: पन्ना 3 या 4 रत्ती
उपरत्न
हरा मरगज अथवा बुध यन्त्र या विधारा की जड़ हरे डोरे य कपड़े में बांधकर गले या बाहु में धारण करें.
व्यवसायिक वस्तुएं
मूंग, रेशम, सूत, कापी, लेखन, सामग्री
व्रत उपवास
बुध देव की पीड़ा से राहत पाने के लिए 27 या 108 बुधवार का व्रत करना चाहिए. पुष्प में हरा फूल ग्रहण करें. गौमाता की सेवा, हरा चारा खिलाना लाभदायक होता हैं.
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