Dhanteras 2025: हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. इस दिन सोने-चांदी और नए बर्तन खरीदने को बहुत शुभ माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं धनतेरस की रात यम का दीपक क्यों जलाया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता.
क्यों जलाते हैं यम का दीपक
धनतेरस या छोटी दिवाली की शाम को यम दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है. माना जाता है कि इस दीपक को जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज प्रसन्न होते हैं. यह दीपक घर के बाहर, दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, क्योंकि यह दिशा यमराज की मानी जाती है. ऐसा करने से परिवार के सभी सदस्यों की लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा बनी रहती है.
इस साल कब जलाएं यम दीपक
धनतेरस के दिन, जो इस साल18 अक्टूबर को पड़ रहा है, यम दीपक शाम के समय में जलाया जाता है. इसे जलाने का शुभ समय शाम 5:48 बजे से 7:05 बजे तक माना गया है.
कब से चली आ रही ये परंपरा
कहा जाता है कि किसी समय हेम नामक राजा का राज्य था. ईश्वर की कृपा से उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ. लेकिन राजकुमार की कुंडली में लिखा था कि उसकी शादी के चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी. राजा ने पुत्र को सुरक्षित रखने के लिए उसे ऐसी जगह भेजा, जहाँ किसी लड़की की छाया भी उस पर न पड़े. वहाँ रहते हुए राजकुमार ने एक राजकुमारी से विवाह कर लिया. शादी के चौथे दिन यमराज के दूत राजकुमार के पास आए. उसकी पत्नी रोने लगी और अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछने लगी. दूतों ने यह सब यमराज को बताया. यमराज ने कहा कि मृत्यु निश्चित है, लेकिन धनतेरस के दिन, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को दीपक जलाने वाले व्यक्ति की अकाल मृत्यु टल सकती है. इसी कारण से हर साल धनतेरस पर यम का दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है.
दीपक जलाने की दिशा
परंपरा के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है. इसलिए दीपक हमेशा दक्षिण की ओर रखकर जलाना चाहिए.
दीपक बनाने का तरीका
आटे से एक बड़ा दीपक तैयार करें. इसमें साफ रुई की दो लंबी बातियों को रखें और सरसों का तेल डालकर दीपक को जलाएं. दीपक को रोली, अक्षत और फूलों से सजाकर पूजन करें.
दीपक स्थापित करने की विधि
पूजन के बाद दीपक को मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर रखते हुए खील या गेहूं के ढेर पर रखें. इसके बाद “ॐ यमदेवाय नमः” का जाप करते हुए दक्षिण दिशा में प्रणाम करें.
यम दीपक क्यों जलाया जाता है?
परंपरा के अनुसार, धनतेरस की शाम यम दीपक जलाने से अचानक संकट और अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिलती है.
धनतेरस कब मनाई जाती है?
धनतेरस हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है. यह दीवाली की शुरुआत का पहला दिन होता है.
धनतेरस का क्या महत्व है?
इस दिन भगवान धनवंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इसे स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व माना जाता है.
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