Chauth Chandra 2026: चौठचंद्र का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को है. चौठचंद्र पर मणिकांचन योग का संयोग होने की वजह से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया. ज्योतिषाचार्य डॉ. रतन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस अद्भुत संयोग में अगर खास उपाय कर लिए जाएं, तो संतान (बच्चे) का चंद्र ग्रह से जुड़ा दोष दूर हो जाता है. इसके परिणामस्वरूप मन शांत, स्वभाव सौम्य और भाग्य में वृद्धि होती है.
चौठचंद्र पर मणिकांचन योग का अद्भुत संयोग
मिथिला पंचांग के अनुसार, चौठचंद्र आज 14 सितंबर 2026 को है. मिथिला की लोकपरंपरा में इस पर्व पर विशेष महत्व है. ज्योतिषाचार्य डॉ. रतन कुमार मिश्रा ने बताया कि यह पर्व मानसिक संतुलन, सौम्य स्वभाव, भग्योन्नति (भाग्य में वृद्धि) मातृ रूपी चेतना को बढ़ाने वाला है. चौठचंद्र के दिन 'मणिकांचन' योग का दुर्लभ संयोग बनने के कारण इस बार की पूजा कई वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी और कल्याणकारी है.
चंद्र ग्रह से जुड़े दोष दूर करने के ज्योतिषीय उपाय
- ज्योतिषाचार्य डॉ. रतन कुमार मिश्रा ने शास्त्र का प्रमाण देते हुए बताया कि चौठचंद्र पर चांदी का बना एक आधा चांद या दो मोती से बना अर्ध चांद बनाकर चौठचंद्र पूजा के समय उसका पूजन कर लें.
- पूजन के बाद उसे लाल धागे में पिरोकर बच्चे को धारण (पहनाना) कराएं. चौठचंद्र पर चांद से जुड़ा यह उपाय करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होंगे.
- उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के प्रमाण के अनुसार, अगर कुंडली में 6 ग्रह मिलकर भी कोई बड़ा संकट (अरिष्ट) पैदा कर रहे हों, तो उसे अकेले चंद्रमा की मजबूत स्थिति से शांत किया जा सकता है.
घर के आंगन में की जाती है चौठचंद्र पूजा
चौठचंद्र पर महिलाएं पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय विधि-विधान से पूजन करती हैं. घर के आंगन में पिठार (चावल का पेस्ट) और सिंदूर से अरिपन (लोक कला) बनाया जाता है जिस पर चंद्र देव को अनेक प्रकार के पकवान और फल का भोग लगाया जाता है. चंद्रोदय होने पर परिवार के सदस्य चंद्र देव को अर्घ्य देते हैं. मान्यता है इस दिन निष्ठापूर्वक चंद्र देव को अर्घ्य देने परिवार समृद्ध और खुशहाल रहता है.
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