Sawan: भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन से शिव पूजा, जलाभिषेक और व्रत करने से महादेव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हालांकि, शास्त्रों में सावन के दौरान कुछ ऐसे नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना उतना ही जरूरी है जितना पूजा-पाठ करना. कहा जाता है कि इस पावन महीने में की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी व्रत और पूजा के शुभ फल को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन में क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए.
सावन में क्या न करें?
- तामसिक भोजन का सेवन न करें: सावन में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अंडे जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए. इस पूरे महीने सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है.
- खंडित बेलपत्र अर्पित न करें: भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. ध्यान रखें कि बेलपत्र कटे-फटे, सूखे या कीड़े लगे हुए न हों. शिवलिंग पर हमेशा स्वच्छ और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही अर्पित करें.
- क्रोध और अपशब्दों से बचें: सावन केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता का भी पर्व है. इसलिए इस दौरान क्रोध करना, किसी का अपमान करना या अपशब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं माना जाता.
सावन में क्या करें?
- नियमित जलाभिषेक करें: श्रावन के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें. ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है.
- शिव मंत्रों का जाप करें: श्रावण मास में भगवान शिव के मंत्रों का जाप विशेष रूप से फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया मंत्र जाप एवं साधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक शुभ फल प्रदान करती है.
- सात्विक आहार: जो श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए. इससे शरीर और मन दोनों की पवित्रता बनी रहती है.
- दान-पुण्य और जीव सेवा करें: सावन में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. साथ ही, पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखें और यथासंभव उनकी सेवा करें.
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