Aparajita Flower Jyotish Upay: अपराजिता का फूल अपनी आकर्षक नीली आभा के कारण ही नहीं, बल्कि अपने गहरे धार्मिक, ज्योतिषीय और औषधीय महत्व के कारण भी विशेष स्थान रखता है. हिंदू मान्यताओं में इस फूल को अत्यंत शुभ माना गया है. ऐसा विश्वास है कि अपराजिता का फूल भगवान विष्णु और शनिदेव दोनों को प्रिय है, इसलिए इसका प्रयोग पूजा-पाठ और उपायों में किया जाता है.
ज्योतिष और वास्तु में अपराजिता का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में अपराजिता के फूल को बेहद प्रभावशाली माना गया है. मान्यता है कि इसके माध्यम से नारायण भगवान, माता लक्ष्मी और शनिदेव की विशेष कृपा परिवार पर बनी रहती है. कई ज्योतिषीय उपायों में इस फूल का प्रयोग करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और भाग्य का साथ मिलता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि अपराजिता का पौधा घर में सही दिशा में लगाया जाए तो यह धन और समृद्धि को आकर्षित करता है. यह पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है. विशेषज्ञों के अनुसार अपराजिता को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे व्यक्ति के जीवन में सफलता, स्थिरता और मानसिक शांति आती है.
अपराजिता के बीज और औषधीय गुण
अपराजिता का महत्व केवल इसके फूल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बीज भी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अपराजिता के बीज का उपयोग सिरदर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है. नीले और सफेद दोनों रंगों की अपराजिता को बुद्धि के विकास में सहायक माना गया है. इसके अलावा यह वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करने में भी उपयोगी बताई जाती है. आयुर्वेद में इसके प्रयोग से कई गंभीर रोगों के उपचार की भी चर्चा मिलती है.
अपराजिता का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से अपराजिता का फूल अत्यंत पवित्र माना गया है. सप्ताह के दिनों के अनुसार भी इसका विशेष महत्व बताया गया है. गुरुवार भगवान विष्णु को और शुक्रवार माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यदि गुरुवार या शुक्रवार के दिन अपराजिता का पौधा लगाया जाए तो घर में लक्ष्मी का वास होता है और विष्णु भगवान की कृपा बनी रहती है. वहीं, अपराजिता के पुष्प अर्पित करने से भगवान शिव भी शीघ्र प्रसन्न होते हैं. अपराजिता का फूल न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि यह आस्था, स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत माना जाता है. यही कारण है कि इसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है.
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जानिए किस दिशा में लगाएं पौधा
वास्तु शास्त्र के अनुसार अपराजिता का पौधा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह दिशा देवी-देवताओं से जुड़ी होती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. पूर्व दिशा में पौधा लगाने से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति व समृद्धि में वृद्धि होती है.
