क्या है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, कैसे करता है काम?

All India Muslim Personal Law Board : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों की एक ऐसी संस्था है, जो शरीयत कानूनों की हिजाफत का जिम्मा उठाए हुए है. बोर्ड की वेबसाइट पर एक तस्वीर लगी है जिसमें लिखा है- The Govt will change, but the Islamic Law can never be changed. इसके लिए बोर्ड मुसलमानों को एकजुट करता है और उन्हें उनके निजी कानूनों के प्रति जागरूक करता है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक तरह से मुसलमानों की संगठित आवाज है. यह आवाज वक्फ बिल का विरोध कर रही है, लेकिन कुछ मुस्लिम संगठन बिल के पक्ष में भी खड़े हैं. आइए जानते हैं कैसे काम करता है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड.

All India Muslim Personal Law Board : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ कानूनों का जबरदस्त विरोध किया है और संसद से बिल के पास होते ही इसके विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा कर दी. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऐलान के बाद देश में यह राय बन रही है कि मुस्लिम समाज वक्फ बिल के खिलाफ है. आखिर क्यों ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध को इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है और यह धारणा बनाई जा रही है कि आम मुसलमान वक्फ बिल के खिलाफ हो सकता है.

क्या है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम समाज का एक सशक्त संगठन है, जो एक तरह से उनकी आवाज होने का दावा करता है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक गैर-सरकारी संगठन जो भारत के मुसलमानों से संबंधित कानूनों(शरीयत के अनुसार) की देखरेख करता है और यह भी ध्यान रखता है कि उन कानूनों की अवहेलना ना हो. बोर्ड एक तरह से शरीयत के अनुसार व्यवहार के लिए लोगों को सलाह और मार्गदर्शन देता है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना 1973 में की गई थी. मौलाना कारी मोहम्मद तैयब कासमी ने बोर्ड का गठन किया था और आजीवन इसके अध्यक्ष रहे.

किन विषयों पर काम करता है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का उद्देश्य एक तरह से शरीयत की रक्षा करना है, इसलिए यह बोर्ड मुसलमानों के जीवन से जुड़े हर मुद्दे मसलन निकाह, तलाक, विरासत, वसीयत, अंतिम संस्कार से जुड़े मुद्दों पर लोगों का मार्गदर्शन करता है और उन्हें अपनी राय भी देता है. बोर्ड का उद्देश्य मुसलमानों को संगठित रखना है, इसलिए बोर्ड की आवाज का महत्व बहुत ज्यादा है.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि इस्लाम अपने अनुयायियों को जीवन से जुड़े हर क्षेत्र के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है. इसके लिए इस्लाम ने मुसलमानों को नियम प्रदान किया है जो ना रीति-रिवाज पर आधारित है, ना रूढ़ियों और ना ही किसी समझौते या बुद्धिजीवियों के उपदेशों पर. इस्लाम ने इसके लिए मुसलमानों को एक पाक किताब दी है, जो कुरान है. इसकी व्याख्या और सत्यता पर प्रत्येक मुसलमान का अटूट विश्वास है. मुसलमानों के कानून उनके धर्म का अविभाज्य हिस्सा है, जिसके संरक्षण के लिए हर मुसलमान सजग और संवेदनशील है.

कैसे काम करता है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड?


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों के निजी कानूनों की रक्षा के लिए तत्पर है और इसके लिए वह मुस्लिम समाज को लगातार एजुकेट भी करता रहता है.मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह चाहता है कि हर मुसलमान अपने निजी कानूनों के प्रति जागरूक रहे, ताकि शरीयत के खिलाफ कोई व्यवहार ना हो. अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए बोर्ड मीटिंग करता है, सलाह देता है और फतवे भी जारी करता है. साथ ही जागरूकता के लिए कई अभियान भी चलाता है.

कौन होते हैं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर मुस्लिम धर्मगुरू, उलेमा यानी विद्वान, वकील और मुस्लिम समाज के प्रतिष्ठित लोग भी शामिल होते हैं. वर्तमान में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष एमएल खालिद सैफुल्लाह रहमानी है. उनके बाद पांच उपाध्यक्ष हैं जिनके नाम हैं-एमएल काका सईद अहमद ओमेरी, जामिया दारुस सलाम, सैयद अरशद मदनी, डॉ सैयद अली मोहम्मद नकवी , जेबी सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी और डॉ सैयद शाह खुसरू हुसैनी . इनके अलावा कार्यकारी मेंबर में जेनरल सेक्रेटरी, सेक्रेटरी, कोषाध्यक्ष और सदस्य भी होते हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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