अगर आप मुसलमान नहीं है, तब भी जानें क्या है वक्फ संशोधन बिल की बड़ी बातें, जो बदल देंगी मुसलमानों का जीवन

Waqf Amendment Bill 2025 Explained : वक्फ क्या है? वक्फ क्यों किया जाता है और मोदी सरकार जो वक्फ संशोधन बिल लेकर आई है, उसमें ऐसा क्या है कि पूरे देश में राजनीति तेज हो गई है और अब तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. वक्फ बिल को लेकर एक ओर जहां मुसलमानों के मन में कई शंकाएं हैं, वहीं कई मुसलमान इस बिल के कुछ प्रावधानों से खुश हैं और उनका यह मानना है कि ये वक्फ को बचाएगा और गरीब मुसलमानों का भला होगा.

Waqf Amendment Bill 2025 Explained : वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को संसद की दोनों सदनों ने पारित कर दिया है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह विधेयक कानून बन जाएगा. लेकिन उससे पहले वक्फ बिल का विरोध शुरू हो गया है. कांग्रेस पार्टी की ओर से सांसद मोहम्मद जावेद और AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं, वहीं कई जगहों पर बिल के खिलाफ प्रदर्शन भी हुआ है और इस बिल को असंवैधानिक बताया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर सरकार लगातार यह कह रही है कि उसने नेकनीयती से यह बिल लाया है और इस बिल के जरिए वह उस गलती को सुधारेगी जो वक्फ के नाम पर किए गए हैं.

वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जा

वक्फ यानी अल्लाह के नाम पर किया गया दान, जिसका उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक दोनों होता है. लेकिन इस बात से मुसलमान समाज भी सहमत है कि वक्फ के नाम पर कई गलतियां हुई हैं. वक्फ की संपत्ति पर अवैध कब्जा है, जिसे हटाने का कोई प्रयास अबतक नहीं किया गया है. इमाम साजिद राशिद यह मानते हैं कि सरकार ने जो वक्फ बिल संसद से पास कराया है, वह सही है. इस बिल का वे लोग विरोध कर रहे हैं, जो वक्फ की करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा जमा कर बैठे हैं. इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि वक्फ की संपत्ति पर जो अवैध कब्जा है उसे हटाया जाएगा या फिर उनसे मुनासिब किराया वसूला जाएगा, ताकि गरीब मुसलमानों का हित साधा जाए. मुसलमानों को यह बिल जरूर पढ़ना चाहिए, जैसे मैंने पढ़ा है उसके बाद ही इस बिल पर राय बनाना चाहिए.

वहीं मौलाना तहजीब भी यह मानते हैं और झारखंड में मौजूद कई वक्फ प्रॉपर्टी का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि जिस प्रॉपर्टी से 20-25 हजार रुपया किराया मिलना चाहिए, वह महज 12-15 सौ रुपए ही मिलता है. अगर मंत्री किरण रिजीजू इस स्थिति में बदलाव कर पाते हैं, तो यह मुसलमानों के लिए बहुत अच्छा होगा.

वक्फ बिल में बाई यूजर के टर्म को हटाया गया

वक्फ बिल में पहले यह प्रावधान था कि इस्तेमाल के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक तय किया जाता था, जिसे बाई यूजर कहा जाता था. इस प्रावधान को सरकार ने हटा दिया है, क्योंकि अगर कोई व्यक्ति 15-20 साल के किसी संपत्ति को इस्तेमाल कर रहा है तो वह उसका मालिक नहीं हो जाता है उसे मालिकाना हक जताने के लिए दस्तावेज देने होंगे, जिसका विरोध हो रहा है. मोहम्मद फैजी जो सुन्नी वक्फ बोर्ड झारखंड के सदस्य हैं, वे इस टर्म को हटाए जाने का विरोध करते हुए कहते हैं कि कोई जरूरी नहीं है कि हर प्रॉपर्टी के कागज हमारे पास हों, उस सूरत में बाई यूजर के जरिए वक्फ की संपत्ति को बताया जा सकता था, लेकिन अब वक्फ की संपत्ति बर्बाद हो सकती है.

वक्फ की संपत्ति रजिस्टर्ड और ऑनलाइन होने से पारदर्शिता रहेगी, भष्ट्राचार पर कसेगा शिकंजा

वक्फ बिल में यह प्रावधान किया गया है कि वक्फ संपत्तियों को रजिस्टर किया जाएगा और उनका विवरण ऑनलाइन भी मौजूद रहेगा. इस व्यवस्था से वक्फ संपत्ति का पूरा विवरण पारदर्शी हो जाएगा और कोई भी व्यक्ति वक्फ की संपत्ति पर अनाधिकार कब्जा नहीं कर पाएगा. साथ ही अगर कोई भ्रष्टाचार हो रहा है, तो उसपर भी लगाम कसी जाएगी.

वक्फ प्रॉपर्टी पर अगर कोई विवाद हो तो खुला है कोर्ट का दरवाजा

वक्फ की संपत्ति पर अबतक जो विवाद होता था, उसके खिलाफ कोर्ट में जाना संभव नहीं था, जिसकी वजह से कई केस इस तरह के सामने आए थे, जिसमें यह आरोप लगा था कि गलत तरीके से किसी की संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दिया गया. लेकिन नए बिल में यह प्रावधान है कि अगर आपको वक्फ की संपत्ति पर कोई शंका है, तो आप रेवेन्यू, सिविल और फिर हाईकोर्ट भी जा सकते हैं.

संपत्ति पर महिला उत्तराधिकार को किया गया है सुरक्षित


वक्फ बिल में महिलाओं के उत्तराधिकार को सुरक्षित किया गया है, ताकि उन्हें संपत्ति से वंचित करके वक्फ ना किया जा सके. बिल का यह प्रावधान महिला अधिकारों को सुरक्षित करता है. बिल में यह प्रावधान भी है कि कोई भी व्यक्ति तभी वक्फ कर सकता है जबकि वह कम से कम पांच साल तक मुसलमान रहा हो, अन्यथा उसके वक्फ को कानूनी नहीं माना जाएगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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