एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर भी थे ब्रांड बेंगलुरु के क्रियेटर एसएम कृष्णा, टेनिस का भी था शौक

SM Krishna Death : एसएम कृष्णा एक एलिगेंट पर्सनालिटी थे, जिन्हें हम बेहद स्टाइलिश और सुंदर कह सकते हैं. लेकिन जब भी कोई व्यक्ति केंद्रीय मंत्री, किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री या राज्यपाल जैसे पदों पर रहता है, तो अकसर हम उसकी ऐसी छवि बनाते हैं, जैसे वह कोई बहुत ही धीर-गंभीर व्यक्ति हो और उसके जीवन में कूटनीति और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के अलावा कुछ होता ही नहीं है. जबकि यह बात हमेशा सच नहीं होती और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमएम कृष्णा के बारे में तो यह बिलकुल भी सच नहीं है.

SM Krishna Death : एसएम कृष्णा 2009 से 2012 के बीच देश के विदेश मंत्री रहे और उस दौरान उन्होंने विश्व मानचित्र पर भारत को आगे लाने में अहम रोल निभाया. साथ ही उन्हें ब्रांड बेंगलुरु का क्रियेटर भी माना जाता है. उन्होंने आईटी उद्योग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा एक और अहम चीज थी, जिसमें एसएम कृष्णा का महत्वपूर्ण योगदान था और वह है पुरुषों के लिए डिजाइनर कपड़े को आकार देना. एसएम कृष्णा एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर भी थे और यह उनका शौक था.

एसएम कृष्णा एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर

एसएम कृष्णा को पुरुषों के लिए कपड़े डिजाइन करने का शौक था.

एसएम कृष्णा को पुरुषों के लिए कपड़े डिजाइन करने का शौक था. लेकिन उनकी यह खूबी राजनीति के उनके भारी-भरकम रुतबों के कारण दब गई और उनके प्रोफाइल से इस खास बात को एक तरह से डिलीट ही कर दिया गया. हालांकि कई जगहों पर उनके प्रोफाइल में इस बात का जिक्र किया गया है, जैसे महाराष्ट्र के राज्यपाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में उनके प्रोफाइल में वेबसाइट पर इस बात का जिक्र है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी हो गए थे एसएम कृष्णा के फैन

एसएम कृष्णा 1960 में अमेरिका में कानून की पढ़ाई कर थे, उस वक्त उन्होंने कैनेडी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि भारतीयों के वर्चस्व वाले इलाके में वे कैनेडी के लिए प्रचार करेंगे. कैनेडी जब राष्ट्रपति चुने गए तो उन्होंने एसएम कृष्णा को पत्र लिखकर उनकी तारीफ की थी. इसकी जानकारी एसएम कृष्णा ने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी थी.

एसएम कृष्णा के जीवन से जुड़ी रोचक बातें

  • एसएम कृष्णा ने मैसूर के सरकारी काॅलेज से कानून की पढ़ाई की थी.
  • 1962 से 68 के बीच में उन्होंने लाॅ के प्रोफेसर के रूप में काम किया.
  • एसएम कृष्णा को पढ़ने के अलावा घूमने और टेनिस खेलने का शौक था.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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