SCO News : जानिए कब बना शंघाई सहयोग संगठन, काैन-कौन से देश हैं इसके स्थायी सदस्य

एससीओ यूरेशिया का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में शांति व सद‍्भावना को बढ़ावा देना है. जानिए कब हुआ इसका गठन…

SCO News : इस महीने की 15 और 16 तारीख को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन, जिसे संक्षेप में एससीओ कहा जाता है, शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत के प्रतिनिधि के रूप में विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान पहुंच चुके हैं. अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी पाकिस्तान पहुंच चुके हैं. जानते हैं एससीओ और इससे जुड़े विभिन्न तथ्यों के बारे में.

क्या है शंघाई सहयोग संगठन

शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ यूरेशिया का एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर शंघाई (चीन) में की थी. इस समूह की स्थापना सदस्य देशों के बीच सहयोग और शांति को बढ़ावा देने के साथ ही एक नये लोकतांत्रिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गयी थी. एससीओ की संयुक्त राष्ट्र, स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल और आसियान सहित प्रमुख क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ साझेदारी है. इस संगठन के भीतर निर्णय लेने के लिए सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति की आवश्यकता होती है. चीन के वरिष्ठ राजनयिक झांग मिंग एससीओ के वर्तमान महासचिव हैं.

ऐसे पड़ी संगठन की नींव

एससीओ की स्थापना से पहले उज्बेकिस्तान को छोड़कर उपरोक्त सभी देश शंघाई फाइव ग्रुप के सदस्य थे. शंघाई फाइव ग्रुप का गठन 26 अप्रैल, 1996 को किया गया था. यह एक राजनीतिक संघ था, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य विश्वास को गहरा करने के समझौते (शंघाई 1996)और सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की उपस्थिति में पारस्परिक कमी लाने के समझौते (मॉस्को 1997) पर आधारित था. इन दोनों ही समझौतों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य क्षेत्र में आपसी भरोसे की एक व्यवस्था तैयार की और सच्ची साझेदारी की स्थापना में योगदान दिया. वर्ष 2001 में शंघाई में वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान पांच सदस्य देशों ने पहली बार उज्बेकिस्तान को शंघाई फाइव ग्रुप में शामिल किया. उज्बेकिस्तान के संगठन में शामिल होने के बाद शंघाई फाइव का नाम बदलकर एससीओ कर दिया गया. इसके बाद 15 जून, 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की घोषणा पर हस्ताक्षर किये गये. आरंभ में, एससीओ ने मध्य एशिया में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद पर अंकुश लगाने के लिए पारस्परिक अंतर-क्षेत्रीय प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया. जून 2002 में, सेंट पीटर्सबर्ग में एससीओ के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की हुई बैठक में एससीओ के चार्टर, यानी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये गये और 19 सितंबर, 2003 को इसे लागू किया गया.

ये हैं सदस्य देश

वर्तमान में 10 देशों को एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा प्राप्त है. ये देश हैं- बेलारूस, भारत, ईरान, कजाखस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान.

इन देशों को पर्यवेक्षक का दर्जा

शंघाई सहयोग संगठन में दो देशों- मंगोलिया और अफगानिस्तान- को एससीओ के पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है. हालांकि वर्तमान में अफगानिस्तान के पर्यवेक्षक का दर्जा निष्प्रभावी है.

14 डायलॉग पार्टनर

चौदह देशों- अजरबैजान, आर्मेनिया, बहरीन, कंबोडिया, मिस्र, कुवैत, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात- को एससीओ के संवाद भागीदार (डायलॉग पार्टनर) का दर्जा मिला हुआ है.

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Published by: Aarti srivastava

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