अफगानिस्तान के कबीलाई परिवार से थे सैफ अली खान के पूर्वज, जानिए अभी परिवार में कौन-कौन हैं सदस्य

Pataudi family: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सैफ अली खान पर हमले की घटना के बाद से ही उनके परिवार पर सबकी नजरें हैं. सैफ के वर्तमान परिवार की बात करें तो यहां हिंदुस्तानी संस्कृति का मिला-जुला रूप नजर आता है क्योंकि उनकी मां और पत्नी दोनों हिंदू हैं. लेकिन अगर हम इतिहास के पन्ने खंगालें तो हमें अफगानिस्तान तक जाना होगा. सैफ के पूर्वज अफगानिस्तान से भारत आए थे और उनका एक कबीलाई परिवार से राब्ता था.

Pataudi Family: पटौदी परिवार के 10वें नवाब और बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सैफ अली खान पर बुधवार की देर रात उनके घर पर हमला हुआ है. बताया जा रहा है कि सैफ पर चाकू से हमला किया गया, जिसमें उनकी रीढ़ और गरदन पर गहरे जख्म हुए हैं. किसी सेलिब्रेटी के घर पर एक अज्ञात व्यक्ति का यूं घुस जाना और उनपर हमला करना कानून व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी घटना है. सैफ अली खान फिलवक्त मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं. सैफ अली खान के पिता मशहूर क्रिकेटर नवाब मंसूर अली खान और बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के बेटे हैं. सैफ अली खान का संबंध जिस पटौदी परिवार से है, उसका संबंध अफगानिस्तान के पश्तून समुदाय से है. 

अफगानिस्तान से भारत आकर पटौदी रियासत की नींव रखने वाले कौन थे?

मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर

पटौदी रियासत की स्थापना मराठा और अंग्रेजों के बीच हुए दूसरे युद्ध के बाद हुई थी. इस युद्ध में पटौदी रियासत के संस्थापक फैज तालाब खान थे, जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की सहायता इस युद्ध के दौरान की थी. युद्ध में अंग्रेज विजयी हुए थे और उन्होंने पुरस्कार स्वरूप पटौदी रियासत की स्थापना की थी. पटौदी रियासत वीपी मेनन ने भी अपनी किताब THE STORY OF THE INTEGRATION OF THE INDIAN STATES में इस बात का जिक्र किया है कि पटौदी उन राज्यों में से एक था जिसे लॉर्ड लेक ने शासक परिवारों के संस्थापकों को पुरस्कार के रूप में बनाया था.इन्होंने आजादी के बाद भारत में विलय के कागजात पर हस्ताक्षर कर दिया था और भारतीय संघ का हिस्सा बने थे.इन्हें उस वक्त प्रिवी पर्स दिया गया था, यानी इन्हें हर महीने सरकार की तरफ से पैसे मिलते थे. कहा जाता है कि फैज तालाब खान के पुरखे सलामत खान 1408 में अफगानिस्तान से भारत आए थे. 1804 में फैज तालाब खान ने पटौदी रियासत की नींव रखी थी.

फैज तालाब खान ने मराठों के खिलाफ युद्ध में दिया था ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ

पटौदी रियासत के पहले नवाब फैज तालाब खान अफगानिस्तान के कंधार के रहने वाले थे. वे पश्तून जाति के थे. युद्ध में जीत के बाद अंग्रेजों ने उन्हें पटौदी रियासत पुरस्कार स्वरूप दी और वे पहले नवाब बने.फैज तालाब खान के वंशजों ने 1949 तक शासन किया था उनके बाद पटौदी राज्य को पंजाब में मिला दिया गया था. इस रियासत के अंतिम नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी थे और अंतिम मान्यता प्राप्त नवाब मंसूर अली खान पटौदी थे, जो उनके बेटे थे. 1971 में जब भारत सरकार ने संविधान संशोधन करके शाही अधिकारों को समाप्त कर दिया, तो इनकी नवाबी भी समाप्त हो गई.

पटौदी परिवार के अधिकतर सदस्य पाकिस्तान चले गए

भारत की आजादी के बाद जब देश का विभाजन हुआ तो पटौदी परिवार के अधिकतर सदस्य पाकिस्तान चले गए जिनमें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान भी शामिल हैं. वे बेगम साजिदा सुल्तान के भतीजे थे, साजिदा सुल्तान का संबंध भोपाल के नवाबों से था.

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सैफ के पिता और दादा मशहूर क्रिकेटर रहे

सैफ अली खान के पिता मंसूर अली खान पटौदी भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे कम उम्र के कप्तान बने थे. वे महज 21 साल की उम्र में ही कप्तान बन गए थे. उनके पिता इफ्तिकार अली खान भी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे. मंसूर अली खान ने बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से शादी की थी, उनके तीन बच्चे हैं-सैफ अली खान, सोहा अली और सबा अली खान.

सैफ अली खान ने की दो शादियां

सैफ अली खान का परिवार

पटौदी परिवार के वर्तमान नवाब सैफ अली खान की पहली शादी एक्ट्रेस अमृता सिंह से हुई थी. उनके दो बच्चे हैं इब्राहिम है और सारा अली खान. अमृता सिंह से तलाक के बाद सैफ अली खान ने कपूर फैमिली की एक्ट्रेस करीना कपूर से शादी की है. उनके दो बच्चे हैं जेह अली खान पटौदी और तैमूर अली खान. करीना कपूर ने शादी के बाद अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया है, जिसकी वजह से इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उनकी शादी का विरोध भी किया था और इसे नाजायज करार दिया था. हालांकि करीना और सैफ ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज किया है. सैफ अली खान की बहन सोहा अली खान ने एक्टर कुणाल खेमू से शादी की है, जबकि सबा अली खान जो एक ज्वेलरी डिजाइनर हैं, उन्होंने शादी नहीं की है.

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पटौदी रियासत की स्थापना कब हुई थी?

पटौदी रियासत की स्थापना 1804 में हुई थी.

पटौदी रियासत के संस्थापक कौन थे?

फैज तालाब खान पटौदी रियासत के संस्थापक थे.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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