Mughal Harem Stories : जहांगीर की 300 बीवियों को पछाड़कर नूरजहां बनी थी उसके दिल की मल्लिका?

Mughal Harem Stories : मुगल काल की चर्चा हो और नूरजहां बेगम की चर्चा ना हो, ऐसा संभव नहीं है. इसकी वजह सिर्फ इतनी ही नहीं है कि वह मुगल बादशाह जहांगीर की पत्नी थी. इसके पीछे उस औरत की काबिलियत भी है. नूरजहां एक बेहतर प्रशासक, बेहतरीन ड्रेस डिजाइनर , कला की शौकीन और बेहतरीन पत्नी भी थी. उसने जहांगीर को इस कदर अपने प्रभाव में ले लिया था कि एक समय ऐसा भी था , जब दरबार के सभी फैसले नूरजहां की मर्जी से ही होते थे. नूरजहां के प्रभाव से कट्टरपंथियों को बहुत परेशानी भी थी.

Mughal Harem Stories : मुगल हरम के इतिहास को अगर पलटकर देखेंगे, तो वहां चार सबसे अधिक शक्तिशाली महिलाओं का जिक्र आता है, जिनके नाम हैं–नूरजहां, मुमताज महल, जहांआरा और रोशनआरा. इन चारों शक्तिशाली महिलाओं में से अगर सबसे अधिक प्रभावशाली और बहुमुखी प्रतिभा की धनी रानी की बात की जाए, तो वो थीं नूरजहां. नूरजहां ना सिर्फ अपनी सुंदरता की वजह से, बल्कि अपने राजनीतिक कौशल, कला, खेल, स्टाइल और सामाजिक कार्यों की वजह से भी सबसे अधिक पहचानी जाती हैं.

कौन थी नूरजहां?

नूरजहां बादशाह जहांगीर की पत्नी थी. उसकी शादी 25 मई 1611 को जहांगीर से हुई थी. उसके बारे में यह कहा जाता है कि वह बेहद खूबसूरत थी. इतिहासकार किशोरी शरण लाल ने अपनी किताब The Mughal Harem में उनकी बायोग्राॅफी लिखने वाले बेनी प्रसाद के हवाले से बताया है कि वह बहुत सुंदर थी. उसे प्रकृति ने हर खूबसूरती से नवाजा था. वो बेहद चंचल भी थी. मुगलकालीन औरतों की तरह नूरजहां पर्दा नहीं करती थीं, इसलिए कलाकारों ने उसका चेहरा बार-बार देखा और उसके अनुसार उनके चित्र बनाएं. चित्र के अनुसार नूरजहां का चेहरा अंडाकार था. होंठ बहुत पतले और खूबसूरत, ऊंचा माथा और नीली आंखें थे, जो उसके व्यक्तित्व को बहुत ही शानदार बनाते थे.

नूरजहां और जहांगीर


नूरजहां का असली नाम मेहर-उन-निसा था. उसका जन्म कंधार अफगानिस्तान में हुआ था. उसके पिता मिर्जा गयास बेग मुगलों के मुलाजिम थे. नूरजहां जब 17 साल की थी, तो उसकी शादी एक फारसी मूल के अफसर अली कुली इस्ताजलू उर्फ शेर अफकुन से हो गई थी. इस शादी से नूरजहां को एक बेटी थी, जिसका नाम लाडली बेगम था. 1607 में बंगाल में एक लड़ाई में शेर अफकुन मारा गया. जिसके बाद जहांगीर ने यह आदेश दिया कि उनके परिवार को सम्मानपूर्वक आगरा भेज दिया जाए, क्योंकि आगरा में नूरजहां के पिता मिर्जा गयास बेग (एतिमाद-उद-दौला) महत्वपूर्ण पद पर थे. आगरा पहुंचने पर मेहर-उन-निसा को अकबर की विधवा रूकैया बेगम की महिला-सेविका बनाया गया. इसके बाद ही नूरजहां की हरम में एंट्री हुई.

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क्या नूरजहां के पति को जहांगीर ने मरवाया था?

नूरजहां की पहली शादी फारसी अफसर शेर अफकुन से हुई थी. कई किताबों में ऐसा जिक्र मिलता है कि जहांगीर ने नूरजहां के पति की हत्या करवाई थी, ताकि वह नूरजहां से शादी कर पाए. लेकिन इतिहासकार इस बात से सहमत नहीं हैं. इतिहासकार बेनी प्रसाद कहते हैं कि किसी भी समकालीन फारसी इतिहासकार ने यह कहानी नहीं लिखी है, जहांगीर ने भी जिस तरह शेर अफकुन का जिक्र अपनी किताबों में किया है, उससे ऐसा नहीं लगता है कि उसके मन में उसे लेकर कोई नफरत हो. यूरोपीय यात्रियों ने भी इस तरह का कोई जिक्र नहीं किया है. मुगल हरम में नूरजहां को देखकर जहांगीर उसका दीवाना हो गया था और उसने विवाह का फैसला किया. शादी के समय नूरजहां की उम्र 34 वर्ष की थीं और जहांगीर 42 साल का था.

क्या नूरजहां का दीवाना हो था जहांगीर?

नूरजहां से शादी के बाद जहांगीर ने उसे नूर महल की उपाधि दी थी लेकिन 1616 में उसे नूरजहां यानी दुनिया की रोशनी की उपाधि दे दी गई. जिस वक्त नूरजहां हरम में आई थी, वहां और औरतें भी थीं, लेकिन नूरजहां ने उन सबको दरकिनार करते हुए अपनी जगह बनाई और 1622–23 में पादशाह बेगम यानी साम्राज्य की प्रथम महिला बन गई. जहांगीर के हरम में 300 औरतें थीं, जिनमें उसकी पत्नी, उपत्नी और अन्य औरतें शामिल थीं. चार प्रमुख रानियां थीं, लेकिन नूरजहां ने इन सबको किनारे करते हुए नंबर वन का ताज अपने नाम कर लिया.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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