Magadha Empire : एक थे आचार्य चाणक्य जिनके अपमान ने कराया नंद वंश का पतन और मौर्य वंश की स्थापना

Magadha Empire : मगध साम्राज्य के प्रमुख राजवंशों में नाम आता है मौर्य वंश का. मौर्य वंश की स्थापना आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य की मदद से की थी. मौर्य वंश से पहले नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद ने मगध में अराजकता फैला रखा था, जिससे साम्राज्य कमजोर हो रहा था और सिकंदर जैसे शासक की नजर भारत की धरती पर पड़ चुकी थी. आचार्य चाणक्य ने जिनका बिहार से गहरा और अटूट नाता था, उन्होंने धनानंद को सत्ता से हटाया और सभी जनपदों को एक करके एक भारत देश की कल्पना को साकार किया था.

Magadha Empire 7 : आधुनिक बिहार जिसे प्राचीन समय में मगध कहा जाता था, उसका इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. मगध पर शासन करने वाले राजवंशों में हर्यक वंश के बाद जिस वंश की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वह है मौर्य वंश. मौर्य वंश की स्थापना आचार्य चाणक्य के दिशा निर्देश पर चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी. मौर्य वंश की स्थापना की कहानी बहुत ही दिलचस्प है, चंद्रगुप्त मौर्य ने मगध पर शासन कर रहे नंद वंश के राजा धनानंद को परास्त कर मौर्य वंश की स्थापना की थी.

मौर्य वंश से पहले मगध पर था नंद वंश का शासन

मौर्य वंश के शासन से पहले मगध पर नंद वंश का शासन था. इस वंश के शासकों ने लगभग 343 ईसा पूर्व से 321 ईसा पूर्व तक मगध पर शासन किया. नंद वंश की स्थापना महापद्मनंद ने शिशुनाग वंश के अंतिम राजा महानंदी की हत्या करने के बाद की थी. महापद्मनंद ने मगध के साम्राज्य का काफी विस्तार किया और इसे लगभग पूरे उत्तर भारत में फैला दिया. महापद्मनंद ने कलिंग पर भी विजय पा ली थी. नंद वंश का शासनकाल काफी सीमित रहा था, इसलिए इसकी वंशावली को लेकर भी काफी विवाद है. बौद्ध साहित्य महाबोधिवंश  में यह जिक्र है कि नंदवंश में आठ राजा हुए और धनानंद उनका अंतिम शासक था. रोमिला थापर आरसी मजूमदार और डीडी कौसांबी जैसे इतिहासकारों ने नंद वंश के शासकों को क्षत्रिय नहीं माना है. इनका मानना है कि संभवत: नंद वंश के शासक शूद्र या नीची जाति के थे. लेकिन ये सभी इतिहासकार यह मानते हैं कि नंद वंश के शासकों ने पूरे उत्तर भारत और दक्षिण के हिस्सों को एक केंद्रीय शक्ति के अधीन कर दिया था. नंदों का साम्राज्य काफी समृद्ध भी था. आरसी मजूमदार और ग्रीक इतिहासकार जस्टिन ने नंद शासकों को क्रूर शासक भी बताया है. नंद वंश का अंतिम शासक धनानंद काफी आततायी था और उसे प्रजा की कोई चिंता नहीं थी वह बस अपनी समृद्धि और विलासिता में मग्न रहता था.

धनानंद एक अत्याचारी शासक था

मगध-के-नागरिक

नंदवंश का अंतिम शासक धनानंद बहुत ही विलासी और भ्रष्ट था. उसके शासनकाल में जनता परेशान थी और उसके अपने मंत्री और महामंत्री भी उससे परेशान थे. उसपर राजकोष को खाली करने और जनता पर अत्याचार करने का आरोप भी लगा था. उसके अत्याचारों से जब मगध की जनता बहुत परेशान हो गई तो पाटलिपुत्र के एक शिक्षण चणक वे राजा धनानंद का विरोध करते हुए उसके खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू किया, धनानंद ने उसकी हत्या करवा दी. अपने महामंत्री शकटार को भी उसने गिरफ्तार कर लिया था, क्योंकि वे जनता के हित की बात करते थे. भारत पर विदेशी शासकों का हमला हो रहा था, लेकिन धनानंद अपने भोग-विलास में मग्न था. जबकि उसके पहले के शासकों ने राज्य का विस्तार किया था. धनानंद के शासनकाल में मगध अराजक स्थिति से गुजर रहा था और राजा को किसी की भी चिंता नहीं थी.

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धनानंद से चाणक्य ने लगाई थी गुहार

तक्षशिला के आचार्य विष्णुगुप्त जिन्हें चाणक्य ने नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने धनानंद से यह गुहार लगाई थी कि वे अपनी विशाल सेना को लेकर विदेशी आक्रमणकारी सिकंदर से देश की रक्षा करें. यूनान के शासक सिकंदर ने 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया था. उस वक्त आचार्य विष्णुगुप्त जिनकी तक्षशिला में ख्याति थी, उन्होंने मगध की राजधानी पाटलिपुत्र का रुख किया और मगध के राजा धनानंद से मदद मांगी थी और यह कहा था कि वे भारत को बचाने के लिए सभी जनपदों को एक करें और अपने नेतृत्व में भारत को विदेशी आक्रांताओं से बचा लें. लेकिन धनानंद जो सत्ता के मद में विलासी हो गया था, उसने विष्णुगुप्त का अपमान करके उन्हें अपने राजमहल से निकाल दिया था. इस अपमान से पीड़ित होकर चाणक्य ने नंद वंश को समाप्त करने की प्रतिज्ञा ली थी और यह काम उसने पूरा किया थी. आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य की सहायता से नंद वंश के शासन का अंत कर मौर्य वंश की स्थापना की और पूरे भारतवर्ष को एक सूत्र में बांधा. मौर्य वंश के शासनकाल में भारत एक केंद्रीय सत्ता के अधीन था. आचार्य चाणक्य का मगध की धरती से बहुत ही खास नाता था, जिसकी जानकारी मगध साम्राज्य की कहानी के अगली कड़ी में दी जाएगी.

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नंद वंश के अंतिम शासक का नाम क्या था?

नंद वंश के अंतिम शासक का नाम धनानंद था.

मौर्य वंश की स्थापना किसने की थी?

मौर्य वंश की स्थापना आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त की मदद से की थी.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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