इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन पर SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज, 6 माह से 5 साल तक हो सकती है जेल

Kris Gopalakrishnan : कर्नाटक के भोवी या बोवी समुदाय से संबंध रखने वाले प्रोफेसर डी सन्ना दुर्गाप्पा ने एससी/एसटी एक्ट के तहत इंफोसिस के सह संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन, भारतीय विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक बलराम सहित 16 अन्य व्यक्तियों पर मामला दर्ज कराया है. इस एक्ट के तहत गैरजमानती केस दर्ज होता है और सजा छह माह से पांच साल तक की होती है. भोवी समुदाय के लोग वास्तुकला में निपुण होते हैं

Kris Gopalakrishnan : इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन (Kris Gopalakrishnan) पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. क्रिस गोपालकृष्णन के खिलाफ बेंगलुरु के सिविल और सत्र न्यायालय के निर्देश पर सदाशिव नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. क्रिस गोपालकृष्णन के अलावा भारतीय विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक बलराम और 16 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. क्रिस गोपालकृष्णन सहित अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम डी सन्ना दुर्गाप्पा है.

कौन है डी सन्ना दुर्गाप्पा जिसने क्रिस गोपालकृष्णन पर लगाया गंभीर आरोप

क्रिस गोपालकृष्णन पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने वाले दुर्गाप्पा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सेंटर फॉर सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज में प्रोफेसर थे. दुर्गाप्पा का आरोप है कि उन्हें नौकरी से निकालने के लिए पहले उन्हें फर्जी हनी ट्रैप में फंसाया गया. उनके साथ जाति सूचक टिप्पणी करके दुर्व्यहार किया जाता था. उनका आरोप है कि उन्हें जातिसूचक टिप्पणी करके अपमानित भी किया जाता था. 2014 में उन्हें हनी ट्रैप में फंसाया गया था.डी सन्ना दुर्गाप्पा कर्नाटक के भोवी या बोवी समुदाय से आते हैं, जो एक अनुसूचित जाति है.

क्रिस गोपालकृष्णन पर क्यों दर्ज हुआ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला

क्रिस गोपालकृष्ण इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं. साथ ही वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में भी शामिल हैं. प्रोफेसर डी सन्ना दुर्गाप्पा का आरोप है कि 2014 में उन्हें फर्जी हनी ट्रैप में फंसाकर नौकरी से निकाला गया. इसी वजह से वे अब सामने आएं हैं और केस दर्ज कराया है. उनका कहना है कि संस्थान में उनके साथ जाति सूचक टिप्पणी कर दुर्व्यहार किया जाता था. दुर्गाप्पा ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सभी शीर्ष अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है.

क्या है भोवी या बोवी समुदाय

भोवी समुदाय कर्नाटक की अनुसूचित जाति है. भोवी समुदाय के लोगों को बोवी, बयार, भोई के नाम से भी जाना जाता है. यह समुदाय काफी पिछड़ा माना जाता है. प्राचीन समय में भोवी समुदाय के लोग पालकी ढोने और खेतों में मजदूरी करने का काम करते थे. ऐसा माना जाता है कि भोवी नाम का एक राजा था, जिसके नाम पर इस जनजाति का नामकरण हुआ है. वह दक्षिण पूर्वी भारत पर शासन करता था. भोवी जाति के लोग तेलुगु, कन्नड़, तमिल और मराठी भाषा बोलते हैं. विजयनगर साम्राज्य में के कार्यकाल में भोवी जाति के लोगों ने वास्तुकला पर काफी काम किया. इनके पास कुएं खोदने की अनोखी परंपरा भी थी. भोवी समुदाय भगवान शिव का उपासक है. इस जाति में पुरुषों को प्रधानता प्राप्त है. शिक्षा का अभाव अभी भी समुदाय में है और पांच प्रतिशत से भी कम आबादी ही स्नातक तक शिक्षित है.

क्या है एससी/एसटी एक्ट जिसके तहत मामला दर्ज किया गया है?

भारतीय संसद ने देश के पिछड़े समुदाय अनुसूचित जाति और जनजाति को अत्याचार से बचाने के एक कानून बनाया है, जिसे एसएसी/एसटी एक्ट कहा जाता है. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम (The Scheduled Castes and Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989) में पारित हुआ है. अगर किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति को लेकर दुर्व्यहार किया जाता है, तो वो इस एक्ट का सहारा लेकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है. इस अधिनियम में यह व्यवस्था की गई है कि देश का कोई भी व्यक्ति छुआछूत जैसा आचरण नहीं कर सकता है. इस अधिनियम के तहत केस दर्ज होने पर अपराध संज्ञेय माना जाता है और यह गैरजमानती अपराध की श्रेणी में आता है. यह एक्ट 30 जनवरी 1990 से देश में लागू है. इस एक्ट में उन सभी आचरण को अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति को मानसिक या शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जा सकता है. अपराध सिद्ध होने पर छह माह से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है. साथ ही जुर्माने की भी व्यवस्था है. अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और मामला इसी एक्ट के तहत दर्ज होता है तो मृत्युदंड का भी प्रावधान है.

देश में कब लागू हुआ एससी/एसटी एक्ट?

देश में 30 जनवरी 1990 से एससी/एसटी एक्ट लागू हुआ. संसद ने इस एक्ट को 1989 में पारित किया था.

एससी/एसटी एक्ट के तहत दोष सिद्ध होने पर कितनी हो सकती है सजा?

एससी/एसटी एक्ट के तहत दोष सिद्ध होने पर छह माह से पांच साल तक की सजा और जुर्माने की व्यवस्था है. अगर किसी की हत्या हुई हो तो मृत्युदंड भी संभव है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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