India GDP Growth : भारत के जीडीपी ग्रोथ में Boom की वजह क्या है?

India GDP Growth : भारत का जीडीपी ग्रोथ पिछले 6 क्वार्टर के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो यह बता रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था बूम कर रही है ना कि वह डेड होने की ओर है. भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में घरेलू मांग और सरकार की नीतियों की भी अहम भूमिका रही है.

India GDP Growth : भारत का जीडीपी शनिवार सुबह से ही सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है. इसकी वजह यह है कि दूसरी तिमाही में (जुलाई–सितंबर) में जीडीपी ग्रोथ 8.2% रहा है, जो बहुत तेज वृद्धि को दिखाता है. इससे पुराने ग्रोथ रेट पर नजर डालें तो वह 7.8% रही है, जो अप्रैल-जून महीने का आंकड़ा है. जीडीपी में वृद्धि की यह रफ्तार कई मायनों में अहम है और इसका विशेष अर्थ भी है.

जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार क्या कहती है?

दूसरी तिमाही में भारत के जीडीपी की जो रफ्तार रही है, वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज करती है, जिसमें यह कहा गया था कि भारत एक डेड इकोनॉमी है. पहली तिमाही में 7.8% और दूसरी तिमाही में 8.2% का जीडीपी ग्रोथ यह बताता है कि भारत एक तेजी से उभरती हुए अर्थव्यवस्था है ना कि डेड इकोनॉमी.

तिमाही (Quarter)जीडीपी वृद्धि दर (GDP Growth Rate)
Q2 FY 2025-26 (जुलाई–सितंबर 2025)8.2%
Q1 FY 2025-26 (अप्रैल–जून 2025)7.8%
Q4 FY 2024-25 (जनवरी–मार्च 2025)7.4%
Q3 FY 2024-25 (अक्टूबर–दिसंबर 2024)6.2%
Q2 FY 2024-25 (जुलाई–सितंबर 2024)5.4%
Q1 FY 2024-25 (अप्रैल–जून 2024) 6.7%

वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी क्यों?

पूरा विश्व जब वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत में घरेलू मांग लगातार बनी हुई है. भारत के त्योहारों की वजह से घरेलू खपत लगातार बनी रहती है, जो अर्थव्यवस्था को आगे लेकर जाने में अहम है.

घरेलू मांग बढ़ने का अर्थअर्थव्यवस्था पर असर
लोग अधिक खरीदारी करते हैं उत्पादन बढ़ता है
कंपनियां ज्यादा उत्पादन करती हैंनिवेश और रोजगार बढ़ता है
कंपनियों का मुनाफा बढ़ता हैआर्थिक गतिविधि बढ़ती है
राजस्व बढ़ता हैसरकारी खर्च और सुधार की क्षमता बढ़ती है

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

सरकारी नीतियां क्या जीडीपी ग्रोथ की वजह?

भारत के जीडीपी ग्रोथ को हवा-हवाई नहीं कहा जा सकता है, बल्कि यह सरकारी नीतियों का परिणाम है. सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था में बूम लाने के लिए नीतियों में काफी सुधार किया है. सरकार ने कई नीतियां बनाई हैं, आर्थिक सुधार किए हैं और निवेश को भी काफी प्रोत्साहित किया है. सरकार ने मार्केट में निवेश, प्रोडक्शन और कामकाज के माहौल पर खासा ध्यान दिया है.

ये भी पढ़ें : Third World Countries : किसे कहते हैं तीसरी दुनिया, क्या भारत इस सूची में है शामिल?

कहां है मुगलों की शान तख्त ए ताऊस, जिसको बनाने में लगा था 1150 किलो सोना, कोहिनूर और दरिया ए नूर हीरा

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >