ऑपरेशन सिंदूर में छिपा है भारत का 3 संदेश, जानने के बाद गर्व से फूल जाएगा सीना

India Attacks Pakistan : पहलगाम में मारे गए 26 निर्दोष लोगों की तेरहवीं के बाद, जब भारत शोक से उबरा, तो उसने जवाबी हमला किया और मारे गए लोगों को न्याय दिला दिया है. भारतीय सेना द्वारा किए गए स्ट्राइक में 100 से अधिक आतंकी मारे गए हैं. आतंकी मसूद अजहर का पूरा परिवार खत्म हो गया है और वह रो रहा है और अपनी मौत की कामना कर रहा है. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जहां आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दया है, वहीं पूरे देश को एकसूत्र में बांध दिया है. सेना की इस कार्रवाई पर पूरा देश एक स्वर में बोल रहा है और सभी साथ हैं.

India Attacks Pakistan : ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने के बाद देश के विदेश मंत्रालय, सेना और एयरफोर्स की ओर से एक प्रेस ब्रीफिंग की गई. इस ब्रीफिंग में बताया गया कि भारत ने क्यों पाकिस्तान पर स्ट्राइक किया. इस प्रेस ब्रीफिंग के जरिए जहां भारत ने पूरी दुनिया को यह मैसेज दिया कि भारत अपनी रक्षा करने में समर्थ है, वहीं यह भी बताया कि भारत आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रखता है. इस प्रेस ब्रीफिंग पर गहराई से नजर डालें, तो यह महसूस होता है कि भारत में एक बहुत बड़ा मैसेज पाकिस्तान के साथ-साथ अपने देश के लोगों को भी दिया है.

1. भारत के मुसलमानों पर मोदी का विश्वास

ऑपरेशन सिंदूर पर आज जो प्रेस ब्रीफिंग की गई, उसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया है. उन्होंने पूरे विश्व के साथ-साथ भारतीयों को भी यह संदेश दिया है कि देश में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है. पीएम मोदी ने यह संदेश दिया है कि पूरा देश एक धर्म को मानता है वह है-देशहित सर्वोपरि. जो लोग यह कहते नहीं थकते थे कि पीएम मोदी मुसलमान विरोधी हैं, शायद उन लोगों को मैसेज देने के लिए ही एक महिला कर्नल सोफिया कुरैशी के जरिए सेना की कार्रवाई को पूरे विश्व और देश के सामने रखा गया है. सरकार यह साबित करना चाहती है कि धर्म के आधार पर देशवासियों में कोई भेदभाव भारत में तो नहीं किया जाता है. प्रेस ब्रीफिंग के बाद एक मुसलमान सेना अधिकारी की खूब प्रशंसा पूरे देश में हो रही है, क्योंकि उन्होंने बेहतरीन तरीके से देश की बातों को इतने बड़े मंच पर रखा. सोफिया का आत्मविश्वास ना सिर्फ देशवासियों को गौरवान्वित कर रहा था, बल्कि उनमें देशभक्ति की भावना को भी बढ़ा रहा था.

2. नारी शक्ति का प्रदर्शन

ऑपरेशन सिंदूर का संदेश

सशस्त्र सेना की दो महिला अधिकारियों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी प्रस्तुत कर यह संदेश दे दिया गया है कि भारतीय सेना किस तरह मजबूत और आत्मनिर्भर है. यह सरकार का पाकिस्तानी अधिकारियों को बहुत बड़ा जवाब है. नारी शक्ति के प्रदर्शन से जहां भारत ने अपने देश की समृद्धि का प्रदर्शन किया है, वही पाकिस्तान को यह भी बताया है कि भारत से टक्कर मत लो क्योंकि वहां हथियार उठाने में सिर्फ मर्द नहीं औरतें भी उतनी ही मजबूत हैं. नारी शक्ति के जरिए भारत ने पाकिस्तान को एक तरह से आईना भी दिखाया है कि उनके देश में जहां महिलाएं आज भी बुर्के में कैद हैं, वहीं भारतीय महिलाएं देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

3. आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति

ऑपरेशन सिंदूर के प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने बहुत ही स्पष्ट तौर पर बताया है कि भारत ने पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकानों या आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया है. ब्रीफिंग में यह स्पष्ट कहा गया है कि हमारी सेना ने सिर्फ और सिर्फ उन अड्डों को निशाना बनाया जहां आतंकी छुपे थे और जहां कसाब और उसके जैसे अन्य आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती थी. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर अपने पोस्ट में यह स्पष्ट भी कर दिया था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखता है और अगर किसी ने भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश की तो उसे जवाब दिया जाएगा.

आतंकियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी शामिल

भारतीय सेना ने यह जानकारी दी है कि स्ट्राइक में 100 से अधिक आतंकी मारे गए हैं और उनके ट्रेनिंग कैंप पूरी तरह तबाह हो गए हैं. आतंकी मसूद अजहर के परिवार के 14 लोग मारे गए हैं. सोशल मीडिया में जो वीडियो सामने आ रहे हैं, उसमें यह दिख रहा है कि आतंकियों के जनाजे में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं. इन वीडियो ने यह साफ होता है कि आतंकवाद से पाकिस्तान का कितना करीबी नाता रहा है, भले ही पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा हो.

पाकिस्तान ने अगर अब की कोई हिमाकत, तो भुगतना पड़ेगा

भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी युद्ध हुआ है, तो भारत जीता है और वो भी नैतिकता के साथ. ऑपरेशन सिंदूर में भी भारत की नैतिकता साफ नजर आ रही है कि अपने निर्दोष नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए भारत ने यह कार्रवाई की है. प्रेस ब्रीफिंग में यह बात कही गई है कि अगर अब पाकिस्तान कोई हिमाकत करेगा, तो उसे बड़े परिणाम भुगतने पड़ेंगे. सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने विभिन्न देशों के सुरक्षा सलाहकारों को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का हमारा कोई इरादा नहीं है, लेकिन अगर पाकिस्तान इस तरह की कोई हरकत करता है, तो हम जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. वहीं पाकिस्तान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में यह कहा है कि भारत ने युद्ध जैसे हालात बना दिए हैं, इसलिए पाकिस्तान अपनी सुरक्षा करने के लिए जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है.उसने कहा कि पाकिस्तान पीओके और पाकिस्तान के संप्रभु इलाके में हमले किए हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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