मौत के साये में 54 मासूम, विकास की बाट जोहता पश्चिमी सिंहभूम का माइलपी गांव, देखें Video

Ground Report: स्कूल में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चे नदी का पीला और मटमैला पानी पीने और अपनी थालियां धोने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी की इतनी किल्लत है कि वे ‘चुआं’ (जमीन खोदकर निकाला गया पानी) का उपयोग करते हैं. मिड-डे मील की स्थिति भी चिंताजनक है. बच्चों को केवल दाल, चावल और आलू मिलता है.

Ground Report: झारखंड राज्य के गठन के 25 साल बाद भी जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है. पश्चिमी सिंहभूम जिले का माइलपी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. जान दांव पर लगाकर 54 मासूम हर दिन सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं. स्कूल जाने के लिए न तो सड़क है, न स्कूल में पीने लायक पानी है.

54 बच्चों के लिए एक शिक्षक का संघर्ष

पश्चिमी सिंहभूम जिले के इस स्कूल में वर्ष 2020 से एकमात्र शिक्षक काम कर रहे हैं. जैतून निस्तारबरजो हर दिन करीब 13 किलोमीटर गाड़ी से और फिर 4-5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं. पहाड़ों और जंगलों से होते हुए जैतून स्कूल तक पहुंचते हैं. वह बताते हैं कि खराब रास्ते की वजह से कोई दूसरा शिक्षक यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. बच्चों के भविष्य की खातिर वे बारिश और कीचड़ की परवाह किये बिना रोज स्कूल आते हैं.

Ground Report: टिन की छत और करंट का डर

स्कूल की स्थिति इतनी भयावह है कि कक्षाएं टिन से बनी एक अधूरी इमारत में चलती हैं. करंट लगने के डर से शिक्षक ने बिजली का कनेक्शन काट रखा है, क्योंकि जरा-सी लापरवाही बच्चों की जान ले सकती है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के मानकों के अनुसार, 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन यहां 54 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ा रहे हैं. बच्चों की मातृभाषा ‘हो’ है, जबकि शिक्षक को केवल हिंदी आती है. इससे संवाद और शिक्षा में भी बड़ी बाधा आती है.

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पोषण के नाम पर खानापूर्ति

स्कूल में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चे नदी का पीला और मटमैला पानी पीने और अपनी थालियां धोने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी की इतनी किल्लत है कि वे ‘चुआं’ (जमीन खोदकर निकाला गया पानी) का उपयोग करते हैं. मिड-डे मील की स्थिति भी चिंताजनक है. बच्चों को केवल दाल, चावल और आलू मिलता है. इसमें स्वाद और पोषण के नाम पर सिर्फ हल्दी और नमक होता है. यह सरकारी मानकों (450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन) का खुला उल्लंघन है.

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा

गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है. बीमार होने पर बच्चों और ग्रामीणों को खटिया (चारपाई) पर लादकर ले जाते हैं. गांव में मोबाइल टावर तो लग गया, लेकिन सड़कें आज भी गायब हैं. स्थानीय लोग और शिक्षक कहते हैं कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं. उसके बाद कोई नहीं आता. शौचालय और चापाकल के आवेदन आज भी फाइलों में दबे हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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