मिडिल ईस्ट में आ रहा एक और US वॉरशिप और 2500 कमांडो, क्या है ट्रंप का इरादा?

Iran War USS Tripoli: अमेरिका ईरान युद्ध में अपनी सैन्य ताकत को और बढ़ा रहा है. मिडिल ईस्ट में अब तीसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस त्रिपोली आ रहा है, वहीं कैलिफोर्निया के कॉम्बैट सेंटर से 2500 मरीन सैनिकों को भी भेजा जा रहा है.

Iran War USS Tripoli: ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. इसी बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वॉशिंगटन ने करीब 2,500 मरीन सैनिकों और एक बड़े उभयचर युद्धपोत (एम्फीबियस असॉल्ट शिप) को मध्य पूर्व की ओर भेजने का आदेश दिया है. माना जा रहा है कि यह कदम क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया है. 

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक सेना की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के सैनिकों और उभयचर हमला (समुद्र से जमीन पर हमला) करने में सक्षम युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली (LHA-7) को मध्य पूर्व की ओर रवाना होने का निर्देश दिया गया है. इससे इलाके में अमेरिकी सैन्य ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं.ृ

संकट की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार

मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को विशेष रूप से आपात स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रखा जाता है. यह फोर्स समुद्र से हमला करने, दूतावासों की सुरक्षा करने, संकटग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों को निकालने और मानवीय आपदाओं के समय राहत अभियान चलाने में भी सक्षम माना जाता है. 

हालांकि, न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि इस तैनाती का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका तुरंत किसी जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों और शिप की तैनाती, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सैन्य प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

अलग-अलग जगह से भेजे जा रहे जहाज और सैनिक

जानकारी के अनुसार 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और यूएसएस त्रिपोली फिलहाल जापान में तैनात हैं. हाल के दिनों में ये जहाज प्रशांत महासागर में सैन्य अभ्यास और गश्त करते देखे गए थे. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में इन जहाजों को ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय लग सकता है. 

वहीं, अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित मरीन कॉर्प्स एयर ग्राउंड कॉम्बैट सेंटर- ट्वेंटी नाइन पाम्स से इन 2500 सैनिकों को भेजा जा रहा है. यह केंद्र अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का सबसे बड़ा प्रशिक्षण अड्डा माना जाता है, जहां सैनिकों को अलग-अलग तरह के सैन्य अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और जरूरत पड़ने पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है.

अरब सागर में पहले से मौजूद अमेरिकी बेड़ा

इस सप्ताह की शुरुआत में यूएस नेवी के करीब 12 वॉरशिप अरब सागर में तैनात थे. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) और आठ डेस्ट्रॉयर शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अगर यूएसएस त्रिपोली भी इस बेड़े में शामिल हो जाता है तो यह विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के बाद इस इलाके में मौजूद दूसरा सबसे बड़ा अमेरिकी जहाज होगा.

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कतर के बेस पर हजारों अमेरिकी सैनिक

मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं है. माना जाता है कि यहां पर 40-50 हजार अमेरिकन ट्रूप यहां पर तैनात हैं. कतर में स्थित अल उदैद एयरबेस में आम तौर पर करीब 8,000 अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं. यह क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है. अब इन सैनिकों की बढ़ोतरी के बाद अमेरिका के सैनिकों की संख्या और बढ़ जाएगी.  

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

यह सैन्य तैनाती ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है. ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी देशों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए हैं और उसने प्रभावी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है.

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लगातार बढ़ रहा क्षेत्रीय तनाव

इस बीच ईरान की ओर से इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले जारी हैं, जबकि अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमान ईरान के भीतर सैन्य और अन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.

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By Anant narayan shukla

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