अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता पाने वालों की डोनाल्ड ट्रंप ने डुबोई लुटिया, जानें आगे क्या है रास्ता

Birth right Citizenship : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पास कर यह आदेश दिया है कि अब अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता समाप्त हो जाएगी. ट्रंप सरकार के इस आदेश के बाद वहां रह रहे 40 लाख भारतीय परेशानी में हैं, क्योंकि उनके बच्चों का भविष्य अब अधर में है, हालांकि अभी इस आदेश पर कोर्ट ने रोक लगाई लगा दी है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश को रद्द करना बहुत मुश्किल है.

Birth Right Citizenship : अमेरिका में रह रहे भारतीयों को डोनाल्ड ट्रंप के डराने वाले फैसले से थोड़ी राहत मिली है. डेमोक्रेटिक पार्टी की अपील पर एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जो जन्म आधारित नागरिकता के सिद्धांत को समाप्त कर रही थी. अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेने के साथ एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पास किए जिसमें कई आदेशों के साथ ही इस बात की घोषणा भी कर दी गई कि अब देश में जन्म आधारित नागरिकता समाप्त कर दी जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले का भारतीयों पर खासा प्रभाव पड़ने वाला है. भारत से वहां गए लोग एच1बी वीजा और एल 1 वीजा के जरिए ही वहां नौकरी करते हैं और फिर ग्रीन कार्ड और फिर वहां की नागरिकता प्राप्त करते हैं.ऐसे अप्रवासियों के बच्चे जब वहां जन्म लेते हैं तो उन्हें स्वत: अमेरिका की नागरिकता मिल जाती है और बच्चे की अमेरिकी नागरिकता की वजह से माता-पिता को भी नागरिकता मिलने में आसानी होती है.

क्या है जन्म आधारित नागरिकता

अमेरिकी कानून में यह व्यवस्था है कि वहां जन्म लेने वाला व्यक्ति वहां का नागरिक बन जाता है. अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में यह व्यवस्था की गई है कि वहां जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति और वहां प्राकृतिक रूप से बसे सभी लोग अमेरिकी नागरिक होंगे. इस कानून के तहत नागरिकता पाने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी सरकार की नौकरी प्राप्त कर सकता है. वह चुनाव में वोट डाल सकता है. अगर उस बच्चे के माता-पिता ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं, तो उनके लिए वह ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का आधार बना सकता है. साथ ही उस बच्चे को इमिग्रेशन संबंधी कागजी कार्रवाई से नहीं जूझना पड़ता है. 

जन्म आधारित नागरिकता समाप्त होने का भारतीयों पर असर

डोनाल्ड ट्रंप एच 1 बी वीजा बंद नहीं करेंगे

अमेरिका में भारतीयों की आबादी लगभग 40 लाख है. इनमें से बड़ी संख्या एच1बी वीजा के जरिए वहां काम करने वालों की है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट किया है कि एच1बी वीजा जारी रहेगा, जिससे भारतीयों को कुछ राहत तो मिली है; लेकिन जो लोग अपने बच्चे के लिए वहां की नागरिकता चाह रहे थे और उनके जरिए अमेरिका की नागरिकता तक पहुंचना चाहते थे उनके लिए बड़ी परेशानी हो सकती है. जिनके पास ग्रीन कार्ड है उन्हें भी नागरिकता मिलने में परेशानी हो सकती है. ग्रीन कार्ड धारक भारतीय माता-पिता के बच्चों के सामने यह परेशानी भी उत्पन्न हो जाएगी कि वे किस देश के नागरिक कहलाएंगे. एच 1 बी वीजा बंद नहीं करने के पीछे वजह यह है कि अमेरिका को टैलेंटेड और कम पैसे में काम करने वाले लोग चाहिए.

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जन्म आधारित नागरिकता का कानून क्या समाप्त हो जाएगा?

अमेरिकी संविधान में जन्म आधारित नागरिकता की बात कही गई है, इसलिए इसे समाप्त करने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी. हालांकि ड्रंप सरकार के मंत्री ने यह स्पष्ट कहा है कि वे कोर्ट में इस कानून के खिलाफ दलील देंगे. अमेरिका के संविधान में संशोधन के लिए दो तिहाई मत की जरूरत होती है, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जन्म आधारित नागरिकता के कानून को समाप्त करने का आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक्जीक्यूटिव ऑर्डर है, जिसके खिलाफ कांग्रेस बहुत कम ही जाती है. अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पास करे, जिसमें कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है. अमेरिकी राष्ट्रपति के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर को चुनौती दी जा सकती है,लेकिन उसे रद्द करवाना बहुत मुश्किल होता है. यही वजह है कि ट्रंप का आदेश आते ही गर्भवती भारतीय महिलाएं समय से पहले ही बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं.

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क्या है जन्म आधारित नागरिकता?

जन्म आधारित नागरिकता उसे कहते हैं, जिसमें एक बच्चे को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती है, चाहे उसके माता-पिता उस देश के नागरिक हों या नहीं.

अमेरिकी राष्ट्रपति के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर उसे कहते हैं जो उसे विशेषाधिकार के तहत प्राप्त हैं और जिन आदेशों को जारी करने में उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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