Amitabh Bachchan : अमिताभ बच्चन हमेशा यह क्यों कहते हैं- मन का हो तो अच्छा और मन का ना हो तो और भी अच्छा?

Amitabh Bachchan Birthday : अमिताभ बच्चन के करोड़ों फैन हैं, जो उनके बारे में बहुत कुछ जानना चाहते हैं. उनका जीवन सबको आकर्षित करता है. एक आम मध्यम वर्गीय परिवार से निकलकर वो कैसे सेलिब्रेटी बने? उनका जीवन कैसा था, क्या वे एक शरारती बच्चे थे या वे एक अनुशासित बच्चे थे? अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा में उनके जीवन की कई घटनाओं का वर्णन किया है. उन्होंने किताब में बताया है कि कवि सुमित्रानंदन पंत ने उन्हें अमिताभ नाम दिया था. किस प्रकार अमिताभ पिता के कांधे पर रामनवमी का मेला देखने जाते थे. वे कैसे स्कूल में हताश और निराश हो गए थे और कैसे अमिताभ ने कुली की शूटिंग में घायल होने के बाद जीवन और मृत्यु से संघर्ष किया.

Amitabh Bachchan Birthday : अमिताभ बच्चन 83 साल के हो गए हैं, लेकिन उनकी एनर्जी आज भी हर जेनेरेशन के लोगों को प्रेरित करती है और वे सबके फेवरेट बने हुए हैं. अमिताभ बच्चन अक्सर एक बात दोहराते रहते हैं -मन का हो तो अच्छा और मन का ना हो तो और भी अच्छा. यह शब्द जैसे उनके जीवन का आधार हो. क्या आप जानते हैं कि यह शब्द किनके हैं जिन्हें अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन में उतार लिया है.

नैनीताल के स्कूल में अमिताभ के साथ क्या हुआ था?

अमिताभ के स्कूल की तस्वीर

अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन को नाटकों से बहुत लगाव था. अमिताभ बच्चन जब नैनीताल के अपने स्कूल शेरवुड काॅलेज में शेक्सपियर के नाटक ‘The Tempest’ में प्रिंस फ़रडिनेंड (Prince Ferdinand) का रोल निभा रहे थे, तो उनके माता-पिता दोनों नैनीताल पहुंचे. उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी कि उनका बेटा बड़े मंच पर पहली बार परफाॅर्म कर रहा है. लेकिन नाटक से ठीक एक दिन पहले अमिताभ बच्चन को तेज बुखार हो गया, उस वक्त उनकी उम्र 12-13 साल के करीब थी. अमिताभ की तबीयत इतनी खराब थी कि वे नाटक में अपना रोल नहीं निभा पाए. नाटक खत्म हुआ तो अमिताभ बहुत मायूस हो गए, उनके मुरझाए चेहरे को देखकर अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने उन्हें समझाया और भावनात्मक रूप से उसके साथी बने. उस वक्त हरिवंश राय बच्चन ने उन्हें समझाते हुए कहा था, बेटा देखो-मन का हो तो अच्छा और मन का ना हो तो और भी अच्छा. इन पंक्तियों के जरिए हरिवंश राय बच्चन ने अपने बेटे को संघर्ष और जीवन की सच्चाइयों को स्वीकारने की सीख दी थी. अमिताभ को उनके पिता ने काफी संजीदगी के साथ जीवन को जीने की सीख दी है, जो उनके जीवन में दिखती भी है.अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी के महान कवि और लेखक थे. उनकी आत्मकथा चार खंडों में प्रकाशित है और उनकी आत्मकथा के पहले खंड -क्या भूलूं क्या याद करूं, में इस बात का जिक्र मिलता है.

अमिताभ बच्चन को रामनवमी का मेला देखना क्यों भाता था?

अमिताभ बच्चन का पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में है. उनका बचपन वहीं गुजरा था. क्या भूलूं क्या याद करूं में हरिवंश राय बच्चन ने लिखा है कि रामनवमी के मौके पर इलाहाबाद में झांकी और शोभायात्राएं निकलती थीं, उन झांकियों को देखने के लिए अमिताभ बच्चन अपने पिता के कंधे पर बैठकर मेले में जाते थे. पिता के कंधे पर बैठा बालक अमिताभ बहुत खुश होता था और रामनवमी के मेले का आनंद उठाता था. अमिताभ बच्चन के बचपन की यह घटना यह बताती है कि अमिताभ बच्चन का बचपन से ही अपने पिता से गहरा जुड़ाव था, जो आजीवन रहा. आज भी अमिताभ बच्चन अपने बाबूजी को उसी तरह याद करते हैं. वे अक्सर अपने पिता से पूछते थे कि आप कविताएं क्यों लिखते हैं, उनकी कविताओं का अमिताभ बच्चन पर इस कदर प्रभाव है कि वे अकसर अपने पिता की कविताओं का पाठ ��रते नजर आते हैं और आश्चर्य इस बात का भी है कि उन्हें अपनी पिता की सारी कविताएं याद हैं.

अमिताभ बच्चन को स्कूल जाने से क्यों लगता था डर?

अमिताभ अपनी बेटी श्वेता, बेटे अभिषेक और बहू ऐश्वर्या के साथ अपने जन्मदिन के एक मौके पर

अमिताभ बच्चन के बारे में उनके पिता ने अपनी आत्मकथा में बताया है कि अमिताभ काफी अनुशासित बच्चा थे. वे समय की कद्र करते थे और आजीवन वे इस अनुशासन को बनाए हुए हैं. फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुशासन की बातें हमेशा होती हैं. उनके जीवन से जुड़ा एक प्रसंग काफी रोचक है, जिसमें उनके पहली बार स्कूल जाने की चर्चा है.हरिवंश राय बच्चन लिखते हैं कि स्कूल के पहले दिन अमिताभ बहुत उत्साहित थे, लेकिन उनके अंदर एक डर भी था, जिसे वे समझ रहे थे. स्कूल के पहले दिन अमिताभ घर से निकलते वक्त दरवाजे पर रुक गए और पीछे मुड़कर देखने लगे, हरिवंश राय बच्चन लिखते हैं कि उनकी आंखों में जिज्ञासा थी, लेकिन एक डर भी था. इसकी वजह यह थी कि वे पहली बार घर से बाहर की दुनिया देखने जा रहे थे. उनके पिता ने उनकी भावनाओं को समझा और उन्हें मुस्कुराकर हाथ हिलाकर घर से स्कूल भेजा, ताकि अमिताभ का डर दूर हो जाए और वे पिता के प्यार से सहारा पा सकें.

कुली की शूटिंग पर अमिताभ के घायल होने की सूचना उनके पिता को क्यों नहीं दी गई थी?

कुली मूवी की शूटिंग में घायल होने के बाद जब अमिताभ अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंचे तो पिता का पैर छुआ.

अमिताभ बच्चन जब कुली की शूटिंग पर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, तो उनके पिता को यह सूचना तुरंत नहीं दी गई थी. उनके परिवार वालों ने जिनमें तेजी बच्चन और जया बच्चन शामिल थी, उन्होंने हरिवंश राय बच्चन को यह सूचना इसलिए नहीं दी थी क्योंकि उन्हें लगा था कि हरिवंश राय बच्चन इस सूचना को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. हरिवंश राय बच्चन को यह सूचना अखबार के जरिए मिली थी. इस बात से वे बहुत नाराज हुए थे. अमिताभ बच्चन से उनके पिता का गहरा लगाव था, उन्होंने अपनी आत्मकभा के चौथे खंड ‘दशद्वार से सोपान तक’ में लिखा है कि – जिस पुत्र को बचपन में गोद में लेकर मैं चलता था, आज वही जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा था, और मुझे यह बात छिपाई गई . यह सोचकर मन विदीर्ण हो गया. उन्होंने लिखा है-उस क्षण मैंने भीतर ही भीतर एक संकल्प किया कि यदि ईश्वर मेरे बेटे को जीवन दान दे देता है, तो मैं आजीवन मांस-मछली का सेवन नहीं करूंगा. हरिवंश राय बच्चन ने आजीवन अपने इस संकल्प का पालन किया था. अस्पताल में अमिताभ का संघर्ष, परिवार की व्याकुलता, देशभर में उनके स्वस्थ होने की कामना हर चीज का वर्णन उन्होंने किताब में किया है, जो भावुक करता है.

अमिताभ बच्चन का सरनेम क्या है?

अमिताभ बच्चन का सरनेम श्रीवास्तव है, बच्चन उनका सरनेम नहीं है. उनके पिता हरिवंश राय बच्चन एक कवि और लेखक थी और वे अपने नाम के साथ बच्चन लिखते थे, इसी निकनेम को अमिताभ और उनके परिवार ने सरनेम के जगह पर इस्तेमाल किया है.

अमिताभ को कौन सी एक्ट्रेस अपना क्रश बताती हैं?

अमिताभ बच्चन की सहकलाकार रहीं रेखा उन्हें अपना क्रश बताती हैं और यह कहती हैं कि वो अमिताभ बच्चन को बहुत पसंद करती हैं.

अमिताभ बच्चन का नाम किसने रखा है?

अमिताभ बच्चन का नाम उनके पिता के दोस्त कवि सुमित्रानंदन पंत ने रखा था. अमिताभ का अर्थ होता है अत्यधिक तेज वाला यानी तेजस्वी.

अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान में से अमीर कौन है?

अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान में से ज्यादा अमीर शाहरुख खान हैं. 2025 के आंकड़ों के अनुसार, शाहरुख खान की नेट वर्थ लगभग 7,500 करोड़ रुपए है, जबकि अमिताभ बच्चन की नेट वर्थ लगभग 1,600 करोड़ है. हालांकि 2025 में अमिताभ ने शाहरुख खाने ज्यादा टैक्स भरा है. कुल 120 करोड़ रुपए का टैक्स अमिताभ ने भरा है.

अमिताभ बच्चन की उम्र क्या है?

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 में हुआ था. वे अभी 83 साल के हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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