Air India Plane Crash Report : बोइंग विमान का स्विच खुद ऑन या ऑफ नहीं हो सकता, इरादतन किया गया होगा बंद; जिसने कराई दुर्घटना

Air India Plane Crash Report : अहमदाबाद विमान दुर्घटना क्या किसी साजिश के वजह से हुई? यह सवाल इसलिए आज सबकी जुबान पर है क्योंकि विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट ये कहती है कि दोनों इंजन में फ्यूल सप्लाई बंद होने की वजह से दुर्घटना हुई. टेकआॅफ के कुछ ही सेकेंड बाद पायलट ने यह पाया कि फ्यूल स्विच कट ऑफ मोड में थे, उसने स्विच को चालू भी किया, लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या फ्यूल स्विच को किसी ने जानबूझकर बंद किया था या यह किसी और की साजिश थी.

Air India Plane Crash Report : अहमदाबाद विमान दुर्घटना के ठीक एक महीने बाद एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो चौंकाने वाली तो है ही कई सवाल भी खड़े करती है. 12 जून की दोपहर को जब विमान दुर्घटना हुई तो सहसा लोग विश्वास नहीं कर पा रहे थे. विमान पर सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी, वहीं जिस मेडिकल कॉलेज पर विमान गिरा, वहां 19 लोग मारे गए थे. यह संख्या बाद में और बढ़ गई थी, उस भयंकर दुर्घटना के कई निशान आज भी मौजूद हैं. विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की रिपोर्ट के अनुसार फ्यूल स्विच बंद होने की वजह से यह दुर्घटना हुई.

एएआईबी की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

एएआईबी की रिपोर्ट यह बताती है कि दुर्घटनाग्रस्त बोइंग विमान 787 ड्रीमलाइनर का फ्यूल स्वीच बंद होने होने की वजह से दो पायलटों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और संभवत: यह दुर्घटना की वजह बनी. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दुर्घटना के समय एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि आपने फ्यूल स्विच क्यों बंद कर दिया है, इसपर दूसरे पायलट ने यह जवाब दिया कि उसने बंद नहीं किया है. संभवत: पायलटों ने फ्यूल स्विच को फिर से चालू कर दिया हो,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. एएआईबी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि फ्यूल स्विच बंद होने की स्थिति में विमान के दोनों इंजन में फ्यूल का प्रवाह बंद हो गया, जो दुर्घटना की बड़ी वजह हो सकता है.

क्या विमान का फ्यूल स्विच ऑटोमेटिक होता है?

विमान के इंजन तक फ्यूल पहुंचाने के लिए जो स्विच होता है वो रन और कट ऑफ की स्थिति में होता है. फ्यूल स्विच ऑटोमेटिक तरीके से कट और रन की स्थिति में नहीं आता है, उसे मैनुअली लीवर खिंच कर रन या फिर कट ऑफ की स्थिति में लाया जाता है. उसके बाद चीजें ऑटोमेटिक होती हैं, यानी फ्यूल स्वत: इंजन में जाने लगता है. इसका अर्थ यह है कि लीवर को खिंचा गया था या फिर वह गलती से खिंच गया था. लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) बताते हैं कि जो बोइंग विमान होता है उसके इंजन में दो फ्यूल स्विच लगे होते हैं, जिसे ऑन या ऑफ करके इंजन को चालू या बंद किया जाता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि फ्यूल के जो दो स्विच लगे होते हैं, वे हमारे घर में लगे हुए स्विच से अलग होते हैं. उन्हें चालू या बंद करने के लिए पहले लीवर खिंचना पड़ता है, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. कहने का अर्थ यह है कि फ्यूल स्विच अनजाने में चालू या बंद नहीं हो सकता है, इसे इरादतन ऑन या ऑफ करने के लिए पहले लीवर खिंचा जाता है उसके बाद आगे की क्रिया की जाती है. इस स्थिति में यह सवाल जरूर खड़े होते हैं कि क्या पायलट ने जान बूझकर फ्यूल स्विच को कट ऑफ की स्थिति में रखा था? हालांकि यह रिपोर्ट प्रारंभिक है, इसलिए अभी कुछ कहना थोड़ी जल्दबाजी है, लेकिन यह तो जरूर कहा जा सकता है कि अगर यही हुआ, तो दुर्घटना की यह वजह हो सकता है.

जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना गलत होगा

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कोई भी निष्कर्ष निकालने को गलत बताया है और चेतावनी दी है कि ऐसा ना करें, अभी विस्तृत रिपोर्ट नहीं आई है. विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ भी पक्के तौर पर कहा जा सकेगा. नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कोई भी टिप्पणी करना या निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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