बदलाव की बड़ी कोशिश

महिला आरक्षण के मुद्दे पर सबसे बड़ी बात यह है कि हर नेता और हर दल इसके महत्व को स्वीकार करता है. यह एक हकीकत है कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है.

महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित करने की बरसों से जारी मांग पर एक बड़ी पहल हो चुकी है. महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था करनेवाला 128वां संविधान संशोधन विधेयक आ चुका है, और लोकसभा से लगभग सर्वसम्मति से पारित हो चुका है. वहां इसे जैसा समर्थन मिला, उसके बाद आगे किसी अड़चन की संभावना बहुत कम प्रतीत होती है. बुधवार को लोकसभा में 454 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया और विरोध में केवल दो मत पड़े. महिला आरक्षण के मुद्दे पर सबसे बड़ी बात यह है कि हर नेता और हर दल इसके महत्व को स्वीकार करता है.

यह एक हकीकत है कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है. कहीं ज्यादा तो कहीं कम, मगर दुनियाभर में महिलाओं को असमानता का दंश झेलना पड़ता है. इसकी वजह यही है, कि एक वर्ग बलशाली है, दूसरा कमजोर, जिसे अबला भी कहा जाता रहा है. लेकिन, कोई भी देश या समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसका हर नागरिक सक्षम और समर्थ हो. इसी ध्येय से हमारे जनप्रतिनिधियों समेत समाज को समझनेवाला हर तबका महिला आरक्षण को आवश्यक बताता है. मोदी सरकार के बिल पर लोकसभा में हुई वोटिंग इस बात का प्रमाण है कि विपक्ष भी इसकी हिमायत कर रहा है. लेकिन, विपक्ष ने दो सवाल उठाए हैं. एक, कि बिल तो आ गया मगर इसे तत्काल लागू नहीं किया जा रहा.

और दूसरा, कि जाति जनगणना करवाकर महिला सीटों पर भी पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो. गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में सरकार की ओर से पक्ष रखा, और विपक्ष की चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि ‘श्रीगणेश तो करिए’, और ‘अगर कुछ अधूरा है तो सुधार लेंगे’. यह स्वाभाविक सी बात है कि आम चुनाव से चंद महीने पहले, और अचानक से एक विशेष सत्र बुलाकर जिस तरह से महिला आरक्षण विधेयक को लाया गया है, उसके राजनीतिक निहितार्थ जरूर निकाले जाएंगे.

विपक्ष अगर सरकार के इरादे पर संदेह जता रहा है, तो सत्ता पक्ष भी विपक्ष पर हमले कर रहा है. भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का सारी दुनिया में सम्मान होता है, तो वह इसलिए कि वहां बहस की गुंजाइश रहती है. स्वस्थ बहस की उस परंपरा को कायम रखते हुए महिला आरक्षण के मामले पर हर दल को एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हुए बदलाव की ओर बढ़ने का प्रयास जारी रखना चाहिए. महिलाओं को आरक्षण से निश्चय ही बड़ा सामाजिक बदलाव आयेगा.

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Published by: संपादकीय

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