पैकेटबंद भोजन के खतरे

UNICEF : अध्ययन के मुताबिक, जिन देशों में पिछले 15 साल में सुपरमार्केट से तले-भुने खाद्य पदार्थों की बिक्री में 11 फीसदी वृद्धि हुई है, वे भारत, बांग्लादेश, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर जैसे देश हैं.

UNICEF : देश-दुनिया में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन और इससे होने वाले नुकसान के बीच यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट चौंकाती है. यूनिसेफ ने भारत समेत 97 देशों में अध्ययन कर बताया है कि पिछले 15 साल में दुनियाभर में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की बिक्री 11 फीसदी बढ़ी है, जिससे जेब पर भी असर पड़ा है और स्वास्थ्य पर भी. ज्यादा-से-ज्यादा चेन स्टोर खुलने के बाद लोग इनका अधिक सेवन कर रहे हैं, जिससे उनका मोटापा बढ़ रहा है और रोग भी. जिन देशों में प्रतिव्यक्ति सर्वाधिक चेन किराना स्टोर हैं, वहां लोग ज्यादा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थ खरीदते हैं और उनके मोटे होने की आशंका भी ज्यादा है. कुल 97 देशों में चेन स्टोर से खरीदारी का विश्लेषण कर तैयार की गयी यह रिपोर्ट ‘नेचर फूड’ पत्रिका में प्रकाशित हुई है.

अध्ययन के मुताबिक, जिन देशों में पिछले 15 साल में सुपरमार्केट से तले-भुने खाद्य पदार्थों की बिक्री में 11 फीसदी वृद्धि हुई है, वे भारत, बांग्लादेश, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर जैसे देश हैं. रिपोर्ट का एक चिंतनीय पक्ष यह है कि दक्षिण एशिया में यह बढ़ोतरी अन्य देशों की तुलना में तेज रही. आंकड़े बताते हैं कि बीते डेढ़ दशक में विश्व स्तर पर सुपरमार्केट 23.6 फीसदी बढ़े हैं, जबकि इस दौरान दुनियाभर में मोटापा 18.2 प्रतिशत से बढ़ कर 23.7 प्रतिशत हो गया है. पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की खरीद बढ़ने से अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात में भोजन पर खर्च बहुत अधिक बढ़ा है.

भारत में भी पिछले साल के अंत में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि लोगों के खाद्य बजट में सब्जियों और पैकेटबंद चीजों की ही बड़ी हिस्सेदारी है. खाद्य पदार्थों के व्यापार पर नजर रखने वाली एजेंसी यूरोमॉनिटर के मुताबिक, भारत में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की प्रतिव्यक्ति सालाना बिक्री 2005 में दो किलोग्राम थी, जो 2019 में छह किलोग्राम और 2024 में आठ किलोग्राम हो गयी.

सीएसइ (सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायर्नमेंट) द्वारा भारत में किये गये अध्ययन से भी इसका खुलासा हुआ है कि जंक फूड और पैकेटबंद भोजन मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और दिल की बीमारियां बढ़ा रहे हैं. यह कितना बड़ा मुद्दा है, इसे इसी से समझा जा सकता है कि इस बार बजट से पहले की आर्थिक समीक्षा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर अधिक टैक्स लगाने की सिफारिश की गयी थी. जाहिर है, अगर अभी नहीं संभले, तो बहुत देर हो जायेगी.

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