छोटे शहरों में स्टार्टअप पार्क बनाये जाएं

Startup: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप अभियान के दस वर्ष पूरे होने पर अपने संबोधन में कहा कि 'स्टार्टअप इंडिया एक क्रांति है', तो यह केवल भाषण की पंक्ति नहीं थी. इसके पीछे पूरे एक दशक का अभियान खड़ा था. दस वर्ष पहले जहां देश में गिने-चुने स्टार्टअप थे, आज भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. वर्ष 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी, तब उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या चार-पांच सौ के आसपास थी.

Startup: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप अभियान के दस वर्ष पूरे होने पर अपने संबोधन में कहा कि ‘स्टार्टअप इंडिया एक क्रांति है’, तो यह केवल भाषण की पंक्ति नहीं थी. इसके पीछे पूरे एक दशक का अभियान खड़ा था. दस वर्ष पहले जहां देश में गिने-चुने स्टार्टअप थे, आज भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. जाहिर है, यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि यह युवाओं के सपनों, सरकार की नीतियों और बाजार के भरोसे की संयुक्त परिणति है. वर्ष 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी, तब उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या चार-पांच सौ के आसपास थी. दिसंबर, 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2.09 लाख तक पहुंच गया. यह बताता है कि भारत में जोखिम लेने की संस्कृति मजबूत हुई है. वर्ष 2014 में देश में सिर्फ चार यूनिकॉर्न थे, जिनकी संख्या बढ़कर 125 तक पहुंच चुकी है.

बीते दस वर्षों में 118 नये यूनिकॉर्न बने, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जो बताता है कि भारत अब केवल आइडिया फैक्ट्री नहीं, वैल्यू क्रिएशन मशीन बन चुका है. फंडिंग के मोर्चे पर भारतीय स्टार्टअप्स ने अब तक करीब 151 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया है. वर्ष 2025 में जरूर वैश्विक मंदी का असर दिखा और कुल निवेश घटकर 10.5 अरब डॉलर रह गया, पर शुरुआती चरण की फंडिंग में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई. स्टार्टअप्स का सबसे बड़ा योगदान रोजगार के क्षेत्र में दिखता है. अब तक 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो चुकी हैं. अप्रत्यक्ष रोजगार जोड़ें, तो यह संख्या पचास लाख के पार जाती है. औसतन हर स्टार्टअप 11 युवाओं को रोजगार दे रहा है.

इस बदलाव में सरकार की नीतियों की भूमिका नकारी नहीं जा सकती. फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत अब तक 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया गया है. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड और स्पेस सीड फंड जैसी योजनाओं ने शुरुआती दौर की सबसे बड़ी समस्या- पूंजी की कमी- को काफी हद तक हल किया. सरकारी इ-मार्केटप्लेस जेम पोर्टल पर आज 35 हजार से ज्यादा स्टार्टअप पंजीकृत हैं. इन्हें अब तक पांच लाख से अधिक सरकारी ऑर्डर मिल चुके हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 50 हजार करोड़ रुपये है. पहली बार सरकार स्वयं स्टार्टअप्स की ग्राहक बनी है. इससे न केवल भरोसा बढ़ा, बल्कि बाजार तक पहुंच भी आसान हुई. जन विश्वास अधिनियम के तहत 180 पुराने कानूनी प्रावधानों को अपराध मुक्त किया गया. इससे निरीक्षण राज की संस्कृति कमजोर हुई और अनुपालन प्रक्रिया सरल बनी. आसान एग्जिट नीति ने यह संदेश दिया कि असफल होना अपराध नहीं, सीखने की प्रक्रिया है.

अगर सेक्टर की बात करें, तो फिनटेक सबसे आगे रहा. यूपीआइ ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान बाजार बना दिया. वर्ष 2025 में हर महीने औसतन 1200 करोड़ डिजिटल लेन-देन हुए. इससे फिनटेक सेक्टर को सबसे ज्यादा, करीब 10.5 अरब डॉलर की फंडिंग मिली. हेल्थ टेक ने कोविड के बाद नया रूप लिया. टेलीमेडिसिन अब अस्थायी समाधान नहीं, स्थायी व्यवस्था बन चुकी है. शहरी क्षेत्रों में करीब 60 प्रतिशत लोग ऑनलाइन परामर्श लेने लगे हैं. इससे इलाज सस्ता हुआ और दूरदराज तक पहुंच संभव हुई. एग्रीटेक ने गांव की तस्वीर बदलनी शुरू की है. डीहाट और निंजाकार्ट जैसी कंपनियों ने किसानों को बीज, खाद, बाजार और डेटा से जोड़ा. इससे सप्लाई चेन पारदर्शी हुआ और किसानों की आमदनी में सुधार हुआ. डीप टेक भारत की नयी पहचान बन रहा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी में 2025 के पहले छह महीनों में ही 5.7 अरब डॉलर का निवेश हुआ. ‘अग्निकुल’ और ‘स्काइरूट’ जैसी कंपनियों की सफल लॉन्चिंग ने यह साबित कर दिया कि भारत निजी अंतरिक्ष शक्ति बनने की राह पर है. स्टार्टअप अभियान का असर देश में भौगोलिक स्तर पर भी दिखा है. आज 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं. जयपुर, इंदौर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, पटना और गुवाहाटी जैसे शहर नये इनोवेशन हब बन रहे हैं. अभियान में महिलाओं की भागीदारी भी काफी उत्साहजनक दिखी है.

करीब 45 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है. महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की फंडिंग में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है. अगले दशक में तेज विकास के लिए नये उद्योगों पर भी ध्यान देना होगा. सबसे पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्योंकि भविष्य की लगभग हर इंडस्ट्री एआइ से संचालित होगी और भारत के पास विशाल डेटा संसाधन तथा युवा तकनीकी प्रतिभा मौजूद है. सेमीकंडक्टर इसलिए आवश्यक है क्योंकि चिप्स पर विदेशी निर्भरता रणनीतिक खतरा बन चुकी है और आत्मनिर्भरता समय की मांग है. ग्रीन एनर्जी पर जोर इसलिए जरूरी है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से निपटना और ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाना भारत की मजबूरी बन चुकी है. डिफेंस टेक इसलिए क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा आत्मनिर्भरता के बिना अधूरी है. स्पेस टेक इसलिए क्योंकि भारत की अंतरिक्ष क्षमता अब व्यावसायिक अवसरों में बदल सकती है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकती है. क्लाइमेट टेक पर ध्यान इसलिए आवश्यक है क्योंकि जल संकट और प्रदूषण अब सामाजिक नहीं, सीधे आर्थिक संकट में बदल रहे हैं. मेंटल हेल्थ टेक इसलिए अहम है क्योंकि तनाव और अवसाद नयी महामारी का रूप ले रहे हैं.

सरकार ने इंडिया एआइ मिशन के तहत 38 हजार जीपीयू उपलब्ध कराये हैं. फरवरी, 2026 में प्रस्तावित एआइ इंपैक्ट समिट भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगा. वर्ष 2030 तक स्टार्टअप्स की संख्या 2.4 लाख और यूनिकॉर्न्स की संख्या 280 तक पहुंचने के अनुमान हैं. फिर भी कुछ सुधार जरूरी हैं. टैक्स हॉलिडे की अवधि सात वर्ष की जाये. एंजेल टैक्स पूरी तरह खत्म हो. बिना गारंटी ऋण व्यवस्था मजबूत हो. हर विश्वविद्यालय में इनक्यूबेशन सेंटर अनिवार्य हों. पेटेंट प्रक्रिया तेज और सस्ती बने. सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स को प्राथमिकता मिले. छोटे शहरों में स्टार्टअप पार्क बनाये जायें. असफलता को अपराध न माना जाये. स्टार्टअप इंडिया केवल योजना नहीं, सोच का बदलाव है. भारत अब प्रयोग करने वाला देश बन चुका है. आने वाला दशक निर्णायक होगा. यह यात्रा अभी आधी है, मंजिल अभी बाकी है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By प्रभात सिन्हा

आईटी विशेषज्ञ

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >