तीन लाख के पार चांदी

Silver Price:अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति, औद्योगिक मांग में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से चांदी लगातार महंगी हो रही है. इससे निवेशकों की तो चांदी है, लेकिन खरीदारों पर बोझ बढ़ता ही जा रहा है.

Silver Price: पिछले साल चांदी में जैसी तेजी देखने को मिली थी, वह वैश्विक उथल-पुथल जारी रहने के कारण न सिर्फ जारी है, बल्कि आने वाले दिनों में इसके भाव और बढ़ने की बात कही जा रही है. सोमवार को देश के प्रमुख कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी पहली बार तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली गयी. दरअसल जब भी दुनिया के किसी हिस्से में राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तब अनिश्चितता के माहौल में चांदी और सोना, दोनों ही सुरक्षित निवेश माने जाते हैं.

यूक्रेन में युद्ध जारी रहने के अलावा ईरान में भी हालात अस्थिर बने हुए हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की धमकी दे रखी है. इस पर यूरोपीय संघ ने भी सख्त रुख अपनाया है. अमेरिका-यूरोप के बीच संभावित ट्रेड वार की आशंका से दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव बन गया है. शेयर बाजारों में जब भी अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशक अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए सोने-चांदी जैसी सुरक्षित धातुओं में निवेश करते हैं. चांदी की कीमतों में उछाल की एक बड़ी वजह यह है. दुनियाभर में चांदी की औद्योगिक खपत बढ़ रही है.

खासकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी है. इसलिए भी सफेद धातु में तेजी बनी हुई है. डॉलर में मजबूती और रुपये में कमजोरी का लाभ भी चांदी को मिल रहा है, क्योंकि इससे चांदी खरीदना महंगा हो गया है और इसके दाम बढ़ रहे हैं. अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर बना रहा और भू-राजनीतिक तनाव में कमी नहीं आयी, तो चांदी में तेजी का सिलसिला जारी रहने वाला है. अकेले इसी साल चांदी की कीमत में करीब 30 फीसदी की तेजी आयी है. लेकिन चांदी में जारी तेजी से ग्राहक परेशान हैं और सर्राफा बाजारों में भी रौनक नहीं है.

पहले सोना महंगा होने पर शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने वाले चांदी खरीदते थे. लेकिन इन दिनों चांदी में तेजी सोने की तुलना में ज्यादा है. ऐसे में, शादी के लिए खरीदारी करने वाले लोग बुरी तरह प्रभावित हैं. हालांकि शादी का सीजन फरवरी से शुरू होने वाला है, लेकिन अभी से खरीदारी करने वालों का जोर चांदी के हल्के गहनों पर है, ताकि बजट प्रभावित न हो. इतना ही नहीं, सर्राफा बाजारों के बेरौनक होने के कारण बड़ी संख्या में कारीगरों के पास भी काम नहीं है.

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Author: संपादकीय

Published by: Pritish Sahay

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