प्लास्टिक प्रदूषण

प्लास्टिक प्रदूषण समुद्र की गहराई से लेकर हिमालय की ऊंचाई तक व्याप्त हो रहा है. इससे वन्यजीवों और समुद्रीजीवों का अस्तित्व संकट में है.

सिंगल यूज, यानी एक बार उपयोग कर फेंक दिये जानेवाले प्लास्टिक के प्रदूषण को रोकने के लिए भारत प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 के अंत तक इसे पूरी तरह से बंद करने का आह्वान किया है. इससे पहले पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया था, जिसमें प्रदूषण कारक सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने पर जोर दिया गया है.

अब केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद करने की घोषणा की है. मंत्रालय के अनुसार, अब पॉलीस्टीरिन समेत सभी प्रकार के एकल उपयोग प्लास्टिक के विनिर्माण, आयात, निर्यात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग की इजाजत नहीं होगी. गुब्बारे, आइसक्रीम, कैंडी आदि की प्लास्टिक स्टिक्स, प्लास्टिक कप, गिलास, चम्मच, कांटे, स्ट्रॉ और 100 माइक्रोन से कम पीवीसी बैनर आदि को बैन किया गया है.

पैकेजिंग/ रैपिंग में प्लास्टिक फिल्मों का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. सितंबर, 2021 में 75 माइक्रोन से बारीक पॉलीथिन बैग पर रोक लगायी गयी थी. दिसंबर, 2022 से 120 माइक्रोन से बारीक पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल पर रोक होगी. हालांकि, इन नियमों को धीरे-धीरे लागू होना है, ताकि विनिर्माताओं को अपेक्षाकृत मोटे और रिसाइकलिंग युक्त पॉलीथीन बैग बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.

निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पांच वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है. एक बार इस्तेमाल कर फेंक दिया जानेवाला प्लास्टिक जल प्रणाली को प्रदूषित करता है और शहरों में नालों के जाम होने का कारण भी बनता है. इससे कई बार तो बाढ़ की समस्या गंभीर हो जाती है.

बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की कवायद वर्षों से हो रही है, लेकिन व्यवस्थित जांच और प्रमाणन नहीं होने के कारण नकली बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बाजार में धड़ल्ले से प्रवेश कर रहे हैं. अनेक अध्ययनों में माना गया है कि प्लास्टिक बैग और स्टीरोफोम को विघटित होने में हजारों वर्ष लग जाते हैं. इससे मिट्टी और भूजल का दूषित होना चिंताजनक है. प्लास्टिक प्रदूषण समुद्र की गहराई से लेकर हिमालय की ऊंचाई तक व्याप्त हो रहा है.

इससे वन्यजीवों और समुद्रीजीवों का अस्तित्व संकट में है. स्टीरोफोम में स्टीरीन और बेंजीन जैसे जहरीले रसायन होते हैं, जो कैंसरकारक होने के साथ-साथ तंत्रिका, श्वसन, प्रजनन प्रणाली की बीमारियों का कारण बनते हैं. प्लास्टिक प्रदूषण से निजात के लिए कचरा प्रबंधन को दुरुस्त करना होगा, साथ ही बिखरे प्लास्टिक की समस्या का प्रभावी समाधान ढूंढना होगा.

बिखरे सिंगल यूज प्लास्टिक के नकारात्मक असर के बारे में आमजन नहीं जानते. इसके लिए संचार, रणनीतिक योजना और उपभोक्ता जागरूकता को बेहतर बनाना होगा. इससे पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता आयेगी, साथ ही लोग पर्यावरण कार्यों के लिए भी सशक्त और प्रोत्साहित होंगे.

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Published by: संपादकीय

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