पहलगाम में आतंकी हमला

प्रधानमंत्री ने जिस तरह यह कहा है कि पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले बच नहीं पायेंगे, उससे साफ है कि आतंकियों और उनके प्रायोजकों को इसका अंजाम भुगतना होगा. इस हमले से जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि हमले के बाद से डरे-सहमे पर्यटक स्वाभाविक ही अपनी यात्रा रद्द करवा रहे हैं, जबकि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में यहां रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक आये थे.

जम्मू-कश्मीर अब ज्यादातर बदलाव के लिए ही जाना जा रहा है, जहां चुनाव के बाद उमर अब्दुल्ला की सरकार बनी है, जहां पर्यटन फल-फूल रहा है और जल्दी ही वंदे भारत ट्रेन चलाये जाने की तैयारी है, वहां आतंकवादी हमला होना बेहद चौंकाने वाला है. पहलगाम में आतंकवादियों ने जिस तरह नाम पूछकर पर्यटकों को निशाना बनाया, वह तो और भी गंभीर है. इससे पहले भी धार्मिक पहचान के आधार पर कश्मीरी पंडितों को इस केंद्र शासित प्रदेश से बाहर किया गया था. ऐसे में, आतंकियों की यह रणनीति केंद्र सरकार के लिए चुनौती भरी है. आतंकियों ने न सिर्फ कश्मीर के बहुचर्चित पर्यटन स्थल पहलगाम को हमले के लिए चुना, बल्कि सैलानियों का सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटकों पर हमला बोला. इस हमले की एक मंशा आगामी जुलाई से होने वाली अमरनाथ यात्रा के प्रति तीर्थयात्रियों को डराने की भी हो सकती है. नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ संवाद बंद कर और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाकर पहले से ही आतंकवाद के खिलाफ सख्ती का परिचय दिया था.

पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब से लौटते ही हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में पीड़ित परिवारों से बातचीत की है, सुरक्षा एजेंसियों ने हमले में शामिल तीन आतंकियों के स्केच जारी किये हैं, जबकि एनआइए की टीम स्थानीय पुलिस की मदद करने के लिए पहलगाम पहुंच चुकी है. प्रधानमंत्री ने जिस तरह यह कहा है कि पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले बच नहीं पायेंगे, उससे साफ है कि आतंकियों और उनके प्रायोजकों को इसका अंजाम भुगतना होगा. इस हमले से जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि हमले के बाद से डरे-सहमे पर्यटक स्वाभाविक ही अपनी यात्रा रद्द करवा रहे हैं, जबकि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में यहां रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक आये थे. ऐसे में, सरकार को स्थानीय पर्यटन उद्योग के साथ खड़े होने की भी जरूरत है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है. दशकों की बदहाली के बाद जम्मू-कश्मीर पर्यटन उद्योग के बल पर ही खड़ा हुआ है. ऐसे में, यह आतंकी हमला सिर्फ बाहरी पर्यटकों पर नहीं, बल्कि कश्मीर की नयी पहचान और उसकी अर्थव्यवस्था पर भी है. इसे बचाना है, तो यहां के लोगों को भी आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना होगा.

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