रोजगार के नये अवसर

दुनिया में 30 साल से कम उम्र की सबसे बड़ी आबादी हमारे देश में है, लेकिन हमारे देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रही है और युवाओं के समक्ष पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार की राह स्पष्ट नहीं होती.

भारत की आर्थिक प्रगति की आज सारी दुनिया में चर्चा होती है. कोरोना महामारी के चुनौती भरे दौर के बाद भारत तेजी से आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 2047 तक देश की आजादी के सौ साल पूरे होने तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की चर्चा कर रहे हैं. भारत के विकास को लेकर इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने की संभावना का एक बहुत बड़ा आधार भारत की युवा श्रम शक्ति है. प्रधानमंत्री ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में कहा था कि दुनिया में 30 साल से कम उम्र की सबसे बड़ी आबादी हमारे देश में है, लेकिन हमारे देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रही है और युवाओं के समक्ष पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार की राह स्पष्ट नहीं होती.

हाल में ही हरियाणा से एक खबर आयी थी कि वहां ग्रुप डी की चतुर्थ श्रेणी के साढ़े 13 हजार पदों के लिए साढ़े 13 लाख युवाओं ने आवेदन किया. इसी प्रकार एसएससी की एमटीएस के लगभग डेढ़ हजार पदों के लिए लगभग साढ़े 25 लाख आवेदन आये. इससे पहले मध्यप्रदेश में पटवारी के छह हजार पदों के लिए 12 लाख से ज्यादा आवेदन आये, जिनमें कई इंजीनियरिंग, एमबीए और पीएचडी डिग्रीधारी उम्मीदवार भी शामिल थे. बिहार में भी अभी प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए पदों से लगभग दस गुना ज्यादा आवेदन आये हैं. जाहिर है आवेदक ज्यादा हैं, नौकरियां सीमित. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रख कर प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को तैयार करने पर जोर दिया है और इसे विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है.

शनिवार को एक रोजगार मेले में 51 हजार युवाओं को विभिन्न सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को ध्यान में रख कर एक मिशन मोड में काम कर रही है. इसके लिए नौकरियों के पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा अब कई नये क्षेत्रों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने अक्षय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन, ड्रोन तकनीक और रक्षा निर्यात जैसे क्षेत्रों का नाम लिया. पीएम की बातों से इस बात का अंदाज मिलता है कि बदलती दुनिया में नौकरियों का स्वरूप भी बदल रहा है. ऐसे में नौकरियों के प्रति पारंपरिक सोच से आगे बढ़ कर नौकरियों के नये अवसरों पर नजर रखने और उनके अनुरूप कौशल के विकास से युवा अपना और देश का भी भविष्य संवारने में सक्षम होंगे.

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Published by: संपादकीय

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