आपत्तिजनक और निंदनीय

Foreign Secretary Vikram Misri : विदेश सचिव के खिलाफ जहर उगलने वालों ने यह तक ध्यान में नहीं रखा कि संघर्षविराम पर सहमति दोनों देशों के सेनाधिकारियों की बातचीत के बाद बनी. विदेश सचिव तो इसकी जानकारी दे रहे थे, जिस तरह उन्होंने उससे पहले ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी हर अहम जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की थी.

Foreign Secretary Vikram Misri : भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर कुछ क्षुब्ध लोगों ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके परिवार को जिस तरह ऑनलाइन धमकी देनी शुरू की, वह घोर आपत्तिजनक है. विदेश मंत्रालय के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के साथ यह सलूक जितना शर्मनाक है, उतना ही यह सोशल मीडिया पर व्याप्त जहरीली और बीमार मानसिकता का भी उदाहरण है, जहां किसी मुद्दे पर असहमति किसी के सार्वजनिक अपमान का कारण बन जाती है.

विदेश सचिव के खिलाफ जहर उगलने वालों ने यह तक ध्यान में नहीं रखा कि संघर्षविराम पर सहमति दोनों देशों के सेनाधिकारियों की बातचीत के बाद बनी. विदेश सचिव तो इसकी जानकारी दे रहे थे, जिस तरह उन्होंने उससे पहले ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी हर अहम जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की थी. हैरानी इस पर भी है कि सोशल मीडिया पर लोग उस शीर्ष सरकारी अधिकारी को निशाना बना रहे थे, जिन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में शानदार उपलब्धियां हासिल की है.

अच्छा है कि वरिष्ठ कूटनीतिज्ञों और राजनेताओं समेत प्रशासनिक अधिकारियों के संगठन विदेश सचिव के समर्थन में आगे आये. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी विदेश सचिव की बेटी की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने को बेहद गंभीरता से लिया. हालांकि इतना काफी नहीं है. ट्रोल करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. तभी इस दुष्प्रवृत्ति पर अंकुश लग पायेगा. अगर पहलगाम हमले की ही बात करें, तो पहले ट्रोलर्स ने आतंकी हमले में शहीद हुए एक सैनिक की विधवा को निशाना बनाया, जो सांप्रदायिक सद्भाव की बात कर रही थीं. आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और प्रेस ब्रीफिंग में अपनी शानदार भूमिका के लिए चर्चित-प्रशंसित कर्नल सोफिया कुरैशी तक को ट्रोलर्स ने नहीं बख्शा.

युद्धभूमि में जाये बगैर या प्रशासनिक अधिकारी की चुनौती भरी जिम्मेदारी जाने बगैर सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदार टिप्पणी करना घोर आपत्तिजनक है. सोशल मीडिया पर लोगों को शर्मसार करने की यह दुष्प्रवृत्ति खतरनाक स्तर पर पहुंच गयी है. इस दुष्प्रवत्ति को अगर इसी तरह जारी रहने दिया गया, तो ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का हौसला कमजोर होगा. इसलिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार बनाने के लिए अविलंब कदम उठाने की जरूरत है.

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Published by: संपादकीय

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