दिव्या देशमुख की जीत

Women Chess World Cup 2025 : जॉर्जिया में आयोजित फिडे महिला शतरंज विश्व कप में भी पहली बार चार भारतीय महिला खिलाड़ियों- कोनेरू हंपी, हरिका द्रोणवल्ली, आर वैशाली और दिव्या देशमुख ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा-क्षमता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया था.

Women Chess World Cup 2025 : फिडे महिला चेस वर्ल्ड कप के फाइनल में दिव्या देशमुख की शानदार जीत सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं है, बल्कि यह शतरंज में भारत के दबदबे के कायम रहने का भी प्रमाण है. दिव्या देशमुख की यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय महिला शतरंज नयी ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. शतरंज का महिला विश्व कप जीतने वाली वह पहली भारतीय हैं. शतरंज में भारत की विजयगाथा को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि पिछले साल गुकेश विश्व चैंपियन बने थे. और उसी वर्ष देश की पुरुष और महिला शतरंज टीमों ने 45वें चेस ओलिंपियाड में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया था.

जॉर्जिया में आयोजित फिडे महिला शतरंज विश्व कप में भी पहली बार चार भारतीय महिला खिलाड़ियों- कोनेरू हंपी, हरिका द्रोणवल्ली, आर वैशाली और दिव्या देशमुख ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा-क्षमता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया था. और महज उन्नीस साल की दिव्या देशमुख ने कई शीर्ष रैंक खिलाड़ियों को पछाड़ कर फाइनल में जगह बनायी थी. सेमीफाइनल में उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन चीन की तान झोंगयी को हराया था और हमवतन हरिका द्रोणवल्ली को भी उनसे मात खानी पड़ी थी.

विश्व कप के फाइनल में दिव्या के सामने अपने ही देश की दिग्गज शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी थीं. सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने वाली कोनेरू हंपी के पास शतरंज ओलिंपियाड, एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हैं. फाइनल मुकाबले में दोनों भारतीय दिग्गजों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली. क्लासिकल राउंड के दोनों गेम ड्रॉ रहे, जिसके बाद फैसला रैपिड टाइब्रेकर में हुआ, जहां दिव्या ने बेहतरीन चालों के जरिये अपने से दोगुनी उम्र की प्रतिद्वंद्वी और बेहद अनुभवी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हंपी को मात देकर बाजी अपने नाम कर ली.

इस उपलब्धि के साथ दिव्या देशमुख देश की चौथी महिला शतरंज ग्रैंडमास्टर भी बन गयी हैं. दिव्या पिछले दो साल से शतरंज में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. दक्षिण अफ्रीका के डरबन में अंडर-10 और ब्राजील में अंडर-12 टूर्नामेंट जीतने के बाद 2023 में वह इंटरनेशनल मास्टर बनी थीं. इस विश्व कप में अपने से ज्यादा अनुभवी खिलाड़ियों को मात देकर इस चैंपियन ने भविष्य के प्रति उम्मीदें तो जगा ही दी हैं, वह आज देश में शतरंज की नयी प्रेरणा भी बन चुकी हैं. दिव्या देशमुख की स्वर्णिम उपलब्धि, जाहिर है, लंबे समय तक देश की असंख्य लड़कियों को शतरंज के प्रति प्रेरित और प्रोत्साहित करेगी.

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Published by: संपादकीय

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