मंकीपॉक्स का खतरा

हालांकि भारत में अभी आधा दर्जन से भी कम मामले हैं, पर इसके संक्रमण के प्रसार की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मंकीपॉक्स को वैश्विक स्वास्थ्य चिंता घोषित करने के साथ ही दुनियाभर में इस संक्रमण की रोकथाम की कोशिशों में तेजी आ गयी है. इस पहल में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने एक संक्रमित व्यक्ति से प्राप्त नमूने से मंकीपॉक्स वायरस को अलग कर दिया है. इसी के साथ संस्थान ने संक्रमण की जांच के लिए साजो-सामान तथा विशेष टीका बनाने के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव भी आमंत्रित किया है.

किसी भी संक्रामक बीमारी के सटीक उपचार के लिए सबसे पहले उसके लिए जिम्मेदार वायरस या बैक्टीरिया की पहचान करनी होती है. उसकी संरचना की जानकारी होने के बाद ही उसे निष्क्रिय करने का इंतजाम किया जा सकता है. दुनियाभर में मंकीपॉक्स से 17 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं. हालांकि भारत में अभी आधा दर्जन से भी कम मामले हैं, पर इसके संक्रमण के प्रसार की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है.

इसीलिए चिकित्सा संस्थाएं सचेत हैं तथा सरकार की ओर से कई दिशानिर्देश जारी किये गये हैं. बीमार व्यक्ति को 21 दिनों तक अलग रखने तथा शरीर के संक्रमित हिस्से को ढक कर रखने की सलाह दी गयी है. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आये लोगों को भी अलग रहने को कहा गया है. मास्क पहनने और हाथ साफ रखने के निर्देश भी दिये गये हैं. बुखार, खुजली, चकते होने जैसे लक्षणों के दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

जांच के सामान और टीकों की उपलब्धता होने से मंकीपॉक्स की रोकथाम में बहुत आसानी हो जायेगी. यह याद रखा जाना चाहिए कि कोरोना संक्रमण के दौर में भारत अपनी आबादी के बहुत बड़े हिस्से को टीका इसलिए मुहैया करा सका है क्योंकि दो टीके देश में ही बड़ी मात्रा में उत्पादित हो रहे हैं. कई देशों को भी टीकों का निर्यात किया गया है. भारत दवाओं के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है तथा यहां मेडिकल सामानों का भी व्यापक पैमाने पर निर्माण होता है.

यदि हम जांच के लिए किट बना लेते हैं, तो देशभर में कहीं भी संक्रमण का पता लगाने में आसानी होगी. देश में ही टीकों के निर्माण से हमें दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और हम अन्य देशों की मदद कर सकेंगे. कोरोना काल में हमें इस कड़वे सच का सामना करना पड़ा था कि हमारे अस्पतालों में संसाधनों एवं सुविधाओं की कमी है. कस्बों और दूर-दराज के इलाकों में यह समस्या अधिक गंभीर है.

कोरोना महामारी के अनुभवों से सीख लेते हुए अस्पतालों का इंतजाम कुछ बेहतर तो हुआ है, पर इस दिशा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर मंकीपॉक्स संक्रमण तेजी से बढ़ता है, तो स्वास्थ्य सेवा पर दबाव बढ़ेगा. इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को मुस्तैद रहना चाहिए तथा आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. संक्रमण के बारे में लोगों को जागरूक करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

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