आयात-निर्यात के संकेत

यह बजट ग्रामीण क्षेत्र की उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा. कृषि क्षेत्र अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तीसरे स्तंभ के रूप में स्थापित हो चुका है.

आयात-निर्यात लगातार दूसरे महीने जनवरी में भी बढ़त पर रहा. इससे स्पष्ट है कि कोरोना महामारी से क्षतिग्रस्त हुई आर्थिकी में अब बाह्य और आंतरिक मांग में निरंतरता और बढ़ोतरी हो रही है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी प्राथमिक आंकड़े दर्शा रहे हैं कि बीते महीने आयात 2.05 और निर्यात 5.37 फीसदी बढ़ा है, साथ ही पूर्ववर्ती महीने के सापेक्ष व्यापार घाटा 15.44 बिलियन डॉलर से 14.75 बिलियन डॉलर पर आ गया.

गैर-पेट्रोलियम और गैर-आभूषण आयात में 5.94 प्रतिशत वृद्धि हुई, जो घरेलू गतिविधियों में वृद्धि का संकेत है. एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था में अब घरेलू स्तर पर सतत सुधार दर्ज हो रहे हैं. दवाओं एवं फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग सामानों और लौह अयस्क के निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद रेडीमेड कपड़ों, पेट्रोलियम उत्पादों आदि में कमी के कारण समग्र वृद्धि अपेक्षाकृत कम ही रही है. हालांकि, घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र में चार महीनों से बढ़त, आर्थिक गतिविधियां तथा व्यावसायिक आशावाद भी भारतीय व्यापार के दोबारा पटरी पर लौटने के संकेत दे रहे हैं.

वैश्विक व्यापार में भी सततता आ रही है और महामारी से उत्पन्न बाधाएं अब छंटने लगी हैं. अनेक चुनौतियों के बावजूद भारतीय उत्पाद विश्व मांग का हिस्सा बन रहे हैं, यह भारतीय निर्यातकों के लिए भी आशाजनक है. व्यापार के मोर्चे पर भारत महामारी से पहले जून, 2019 से ही संतोषजनक स्थिति में नहीं था. मार्च, 2020 के बाद तो आयात-निर्यात में गिरावट दोहरे अंकों में आ गयी.

विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, वैश्विक वस्तुगत व्यापार जून की तिमाही में 21 प्रतिशत तक नीचे आ गया था. वैश्विक स्तर पर कारोबार और व्यापार की मजबूती से 2021 में सुधार की रफ्तार तेज होगी. हालांकि, वस्तुगत कारोबार के बनिस्बत सेवा संबंधी कारोबारी गतिविधियों में सुधार कम ही रहेगा.

वजह, जब तक सभी जगह संक्रमण में गिरावट नहीं आयेगी, सीमाओं से परे आवाजाही बाधित रहेगी. पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं के सामान्य होने में अभी भी वक्त लगेगा. पेट्रोलियम और पेट्रोलियम-उत्पादों को छोड़कर जनवरी में निर्यात 25 बिलियन डॉलर से अधिक रहा है, जो कि बीते वर्ष की इस अवधि से 11 प्रतिशत अधिक है. तेल, रत्न और आभूषणों को छोड़कर निर्यात 13.21 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, वहीं तेल के अलावा अन्य आयातों में भी वृद्धि के रुझान हैं.

टेक्सटाइल और लेदर निर्यात-संवर्धित उद्योग हैं और बड़ी संख्या में देश के कामगारों के रोजगार का जरिया हैं. जनवरी में इसमें वृद्धि, इंजीनियरिंग सामानों, फार्मा उत्पादों और लौह अयस्क के सापेक्ष कम रही है. ऐसे में इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा. कारोबारी गतिविधियों में निरंतरता और तेजी आने से ये उम्मीदें पुख्ता हो रही हैं कि वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही सकारात्मक वृद्धि दर्ज करेगी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और हालिया आर्थिक सर्वेक्षण भी 2022 तक सुधार के बाद तेज वृद्धि के दावे कर रहे हैं.

Posted By : Sameer Oraon

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Published by: संपादकीय

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