कोरोना काल में बिहार चुनाव

यह सही है कि पुराने चुनावी दंगल जैसा वातावरण संभव नहीं हो सकता. नुक्कड़ सभाओं से लेकर महारैली में जुटी भीड़ चुनाव का तापमान तैयार करती थी और मतदाता तथा कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय भी.

केसी त्यागी, पूर्व संसद सदस्य

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गत दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि बिहार चुनाव को स्थगित करने का सवाल ही नहीं उठता. चुनाव आयोग की ओर से जरूरी तैयारियां की जा रही हैं. वर्तमान हालात के मद्देनजर आयोग ने कानून एवं न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर 1961 के चुनाव कानून में संशोधन की सिफारिश की है. इसमें 65 वर्ष से अधिक आयु के या संक्रमण काल के चलते एकांतवास में रह रहे मतदाताओं को डाक मतपत्र की सुविधा प्रदान करने की बात कही गयी है.

आयोग के इस सुझाव को मंत्रालय ने भी स्वीकार कर लिया है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पार्टी एवं उम्मीदवारों को हर दौर की कार्यवाही से निरंतर अवगत कराया जायेगा, ताकि मतपत्रों की पारदर्शिता बनी रहे. लगभग 7.18 करोड़ मतदाता अपने मतपत्र का सदुपयोग कर सकेंगे और इसके लिए 97,000 पोलिंग स्टेशनों का निर्माण किया जायेगा.

पाबंदी एवं सामाजिक दूरी बनाने के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित होती है, इसलिए केंद्रीय चुनाव आयोग ने तय किया है कि प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं की संख्या 1000 से अधिक नहीं होगी. आयोग का मानना है कि इसे संपन्न करने के लिए लगभग 34,000 मतदान केंद्रों की आवश्यकता होगी. आयोग के कर्मचारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित आपदा नियंत्रण एक्ट-19 की शर्तों का ठीक से पालन हो.

आपदा प्रबंधन एक्ट और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के पालन के लिए सामाजिक दूरी, सैनिटाइजेशन, मास्क, दस्ताने आदि के इस्तेमाल को सुनिश्चित किया जायेगा. आदर्श चुनाव संहिता के पूर्व निर्धारित एवं नये नियमों का अनुपालन कड़ाई से किया जायेगा. बिहार राज्य चुनाव आयोग इन प्रश्नों पर राज्य के सभी दलों से विचार-विमर्श कर चुका है.

सभी अपना दृष्टिकोण आयोग के सम्मुख प्रस्तुत कर चुके हैं. चुनाव आयोग की स्पष्ट घोषणा के बाद भी कुछ स्वर चुनाव को स्थगित करने को लेकर सुनायी दिये हैं. उनका तर्क है कि संक्रमण में चुनाव संपन्न कराना मुश्किल होगा और इससे संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होगी. संक्रमण के काल में भी कुछ देशों में चुनाव कराये गये हैं. बीते अप्रैल में दक्षिण कोरिया में आम चुनाव हुए हैं.

यहां 66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया, जो विगत 28 वर्षों का रिकॉर्ड मतदान है. इस समय वहां 11,000 सक्रिय मामले हैं और 263 लोगों की मौत हो चुकी है. दक्षिण कोरिया से प्रभावित होकर अब मंगोलिया, श्रीलंका, बुरंडी में चुनावी तैयारी जोर पकड़ चुकी है. अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया चरम पर है. यहां चुनाव इसी साल तीन नवंबर को संपन्न होने हैं.

इससे पहले अरिजोना, फ्लोरिडा, इलिनोस आदि राज्य प्राथमिक चुनावी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं. मतदान के दौरान लंबी कतारों में मतदाताओं ने एक मीटर से अधिक की दूरी के नियम का पालन किया. सभी ने मास्क और दस्तानों का भी प्रयोग किया. साथ ही सभी का तापमान भी मापा गया. ज्यादा तापमान होने पर उन्हें पृथक केंद्रों पर ले जाकर मतदान कराने की व्यवस्था की गयी.

दक्षिण कोरिया में समूची चुनावी प्रक्रिया के दौरान सिर्फ एक व्यक्ति में कोरोना पॉजिटिव के लक्षण पाये गये. राष्ट्रपति मून की पार्टी को 300 सीट के मुकाबले 180 सीट प्राप्त हुईं. पिछले हफ्ते सिंगापुर में भी आम चुनाव संपन्न हुए हैं. सामाजिक दूरी और स्वास्थ्य विभाग की कड़ी चेतावनी के कारण मतदान रात आठ बजे तक चलता रहा. सिंगापुर में मतदान केंद्रों की संख्या 850 से बढ़ाकर 1100 की गयी. चुनाव के नतीजों ने भारतीय मूल के नेता प्रीतम सिंह की पार्टी को विपक्षी पार्टी का दर्जा दिलाया.

यह सही है कि पुराने चुनावी दंगल जैसा वातावरण संभव नहीं हो सकता. नुक्कड़ सभाओं से लेकर महारैली में जुटी भीड़ चुनाव का तापमान भी तैयार करती थी और मतदाता तथा कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय भी. लोकगीतों की तान, ढोल-मंजीरों की आवाजें, गलियों में नारे लगाती टोलियां, वाहनों की लंबी कतारें आदि आत्मीयता एवं रोमांच का अभाव अवश्य खटकेगा.

गृहमंत्री अमित शाह वर्चुअल रैली आयोजित कर एनडीए गठबंधन के चुनाव अभियान की शुरुआत कर चुके हैं. गठबंधन के नायक नीतीश कुमार भी वेबिनार के जरिये निरंतर छह दिनों तक 24 सत्रों में पार्टी के लगभग 20,000 कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुके हैं. नीतीश कुमार ने बिहार के नौजवानों को संबोधित किया कि स्वयं तुलनात्मक अध्ययन करें कि 2005 में बिहार कहां और कैसा था?

अब परिवर्तन के बाद कैसी परिस्थितियां हैं. राजद के कुशासन के दौरान बिहार की विकास दर 3.19 प्रतिशत थी, जो इन 15 वर्षों के सुशासन में 11.3 प्रतिशत हो गयी. राबड़ी देवी जी के शासन काल के अंतिम वर्षों में बिहार का बजटीय प्रावधान 23,800 करोड़ था, जो अब 2.11 लाख करोड़ के नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. प्रति व्यक्ति आय 12 प्रतिशत से बढ़कर 48 प्रतिशत के नये रिकॉर्ड पर है. कुशासन के दौर में 22 प्रतिशत लोगों को ही बिजली मिलती थी, जो अब 100 प्रतिशत लोगों को मिल रही है. एनडीए के नेतृत्व में अपने सात सूत्रीय कार्यक्रम में नूतन एवं नवीन बिहार बनाने के अपने प्रयास को तेज करने के संकल्प को दोहराया गया है.

बिहार का चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो चला है. एनडीए को भी एक बड़ी जीत का इंतजार है. भाजपा कई राज्यों में पराजित हो चुकी है. कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छतीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में हार का मुंह देखना पड़ा. वर्ष 2020 का चुनाव एनडीए के विजय पताका का संदेश वाहक बने, इसके लिए दोनों बड़ी पािर्टया निरंतर प्रयासरत हैं.

बिहार चुनाव का असर अगले वर्ष बंगाल समेत कई राज्यों के चुनावी समीकरण साधने में सहायक होगा. वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश के सामाजिक चुनावी समीकरणों पर बिहार का भी असर पड़ेगा. राजद के नेता ने बिहार की जनता से माफी मांगकर चुनाव की शुरुआत की है. उन्होंने स्वीकार किया है कि लालू-राबड़ी राज के दौरान राज्य में जो भी गलतियां हुई हैं, उसके लिए वे जनता से क्षमाप्रार्थी हैं.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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Author: के सी

Published by: Prabhat Khabar

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